व्रत कथा
प्रमुख हिंदू व्रत — उनका देवता, महत्व एवं लाभ
व्रत सनातन धर्म में आत्म-संयम, शुद्धि एवं ईश्वर के प्रति समर्पण का पवित्र साधन है। प्रत्येक दिन एवं तिथि का व्रत किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित होता है और उसका अपना विशेष फल है। नीचे प्रमुख व्रतों की सूची दी गई है — उनका देवता, महत्व एवं लाभ जानें और श्रद्धापूर्वक व्रत रखकर मनोवांछित फल प्राप्त करें।
✦ प्रमुख व्रत ✦
सोमवार का व्रत भगवान शिव को समर्पित है। इससे मनोवांछित फल, सुख-समृद्धि एवं योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है। शिवजी का जलाभिषेक करें।
मंगलवार व्रत हनुमान जी को समर्पित है। इससे संकटों का नाश, बल-साहस एवं शत्रुओं पर विजय मिलती है। हनुमान चालीसा का पाठ करें।
बुधवार का व्रत विघ्नहर्ता गणेश जी को समर्पित है। इससे विघ्नों का नाश, बुद्धि-विवेक एवं व्यापार में उन्नति होती है।
गुरुवार व्रत से धन, विवाह एवं ज्ञान की प्राप्ति होती है। केले के वृक्ष एवं भगवान विष्णु की पूजा शुभ मानी जाती है।
शुक्रवार व्रत संतोषी माता एवं माँ लक्ष्मी को समर्पित है। इससे सुख-सौभाग्य, धन एवं मनोकामना की पूर्ति होती है।
शनिवार व्रत से शनि की साढ़ेसाती एवं ढैया की शांति होती है। कष्ट, रोग एवं दुर्भाग्य दूर होते हैं। सरसों तेल का दीप जलाएँ।
एकादशी व्रत अत्यंत पुण्यदायी है। इससे समस्त पापों का नाश एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन अन्न का त्याग किया जाता है।
त्रयोदशी तिथि को रखा जाने वाला प्रदोष व्रत रोग-दोष नाश एवं शिव कृपा प्रदान करता है। प्रदोष काल में शिव पूजन करें।
सुहागिन स्त्रियाँ पति की दीर्घायु एवं सुखी दांपत्य जीवन हेतु निर्जल व्रत रखती हैं। चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोला जाता है।
अखंड सौभाग्य एवं पति की लंबी आयु के लिए वट (बरगद) वृक्ष की पूजा की जाती है। सावित्री की कथा सुनी जाती है।
सुखी दांपत्य एवं मनचाहे वर की प्राप्ति हेतु स्त्रियाँ निर्जल व्रत रखती हैं। भगवान शिव-पार्वती का पूजन किया जाता है।
नौ दिनों तक माँ दुर्गा के नौ रूपों की आराधना एवं व्रत किया जाता है। इससे शक्ति, समृद्धि एवं मनोकामना पूर्ति होती है।