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✦ हमारे आराध्य देव ✦
“
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सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज ।
अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः ॥
— श्रीमद्भगवद्गीता (18.66)
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