✦ सुविचार ✦

संतों और शास्त्रों की प्रेरक वाणी — प्रतिदिन एक नया विचार

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राम नाम से बड़ा कोई सहारा नहीं।

— तुलसीदास जी

मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।

— कबीर दास जी

कर्म ही पूजा है — फल की चिंता मत करो।

— श्रीमद्भगवद्गीता

उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।

— स्वामी विवेकानंद

जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाहिं।

— कबीर दास जी

दया धर्म का मूल है, पाप मूल अभिमान।

— तुलसीदास जी

हरि अनंत हरि कथा अनंता।

— तुलसीदास जी

श्रद्धावान् को ही ज्ञान की प्राप्ति होती है।

— श्रीमद्भगवद्गीता

ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोय। औरन को शीतल करै, आपहु शीतल होय।

— कबीर दास जी

जो हुआ अच्छा हुआ, जो हो रहा है अच्छा हो रहा है।

— श्रीमद्भगवद्गीता

अहिंसा परमो धर्मः।

— महाभारत

प्रभु के भरोसे जो रहता है, वह कभी निराश नहीं होता।

— संत वचन

विद्या विनय देती है, और विनय से योग्यता आती है।

— सुभाषित

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।

— कबीर दास जी

सच्चा सुख त्याग और संतोष में है।

— संत वचन

जहाँ प्रेम है, वहीं परमात्मा है।

— संत वचन