राम नाम से बड़ा कोई सहारा नहीं।
— तुलसीदास जी
संतों और शास्त्रों की प्रेरक वाणी — प्रतिदिन एक नया विचार
मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।
— कबीर दास जी
राम नाम से बड़ा कोई सहारा नहीं।
— तुलसीदास जी
मन के हारे हार है, मन के जीते जीत।
— कबीर दास जी
कर्म ही पूजा है — फल की चिंता मत करो।
— श्रीमद्भगवद्गीता
उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।
— स्वामी विवेकानंद
जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाहिं।
— कबीर दास जी
दया धर्म का मूल है, पाप मूल अभिमान।
— तुलसीदास जी
हरि अनंत हरि कथा अनंता।
— तुलसीदास जी
श्रद्धावान् को ही ज्ञान की प्राप्ति होती है।
— श्रीमद्भगवद्गीता
ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोय। औरन को शीतल करै, आपहु शीतल होय।
— कबीर दास जी
जो हुआ अच्छा हुआ, जो हो रहा है अच्छा हो रहा है।
— श्रीमद्भगवद्गीता
अहिंसा परमो धर्मः।
— महाभारत
प्रभु के भरोसे जो रहता है, वह कभी निराश नहीं होता।
— संत वचन
विद्या विनय देती है, और विनय से योग्यता आती है।
— सुभाषित
बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।
— कबीर दास जी
सच्चा सुख त्याग और संतोष में है।
— संत वचन
जहाँ प्रेम है, वहीं परमात्मा है।
— संत वचन