ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद एवं अथर्ववेद — सनातन परंपरा के सबसे प्राचीन ग्रंथ, जिन्हें श्रुति कहा जाता है।
सनातन धर्म की मूल संरचना — ग्रंथ, दर्शन, तीर्थ एवं संस्कार, सब एक जगह संक्षेप में।
ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद एवं अथर्ववेद — सनातन परंपरा के सबसे प्राचीन ग्रंथ, जिन्हें श्रुति कहा जाता है।
विष्णु, शिव एवं ब्रह्म पुराणों सहित अठारह महापुराण — कथाओं के माध्यम से धर्म का व्यावहारिक स्वरूप।
न्याय, वैशेषिक, सांख्य, योग, मीमांसा एवं वेदांत — भारतीय चिंतन की छह प्रमुख दार्शनिक धाराएँ।
धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष — जीवन के चार लक्ष्य, जिनमें संतुलन ही आदर्श माना गया है।
बद्रीनाथ, द्वारका, जगन्नाथ पुरी एवं रामेश्वरम — भारत की चारों दिशाओं में स्थित परम तीर्थ।
सोमनाथ से लेकर घृष्णेश्वर तक — भगवान शिव के बारह स्वयंभू ज्योतिर्लिंग।
माता सती के अंगों के गिरने से बने पावन शक्तिपीठ — देवी उपासना के प्रमुख केंद्र।
गर्भाधान से अंत्येष्टि तक जीवन के सोलह संस्कार, जो हर पड़ाव को मर्यादा से जोड़ते हैं।
ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ एवं संन्यास — आयु के अनुसार जीवन की चार अवस्थाएँ।
ब्रह्मा, विष्णु, महेश तथा सरस्वती, लक्ष्मी, पार्वती — सृष्टि, पालन एवं संहार के प्रतीक।
सूर्य से केतु तक नौ ग्रह, जिनका ज्योतिष एवं दैनिक पूजा दोनों में स्थान है।
वे ग्रंथ जिन्होंने धर्म को कथा एवं संवाद के रूप में जन-जन तक पहुँचाया।