श्रीमद्भगवद गीता

18 अध्यायों में जीवन का सार — पढ़ें, सुनें और जीवन में अपनाएं गीता का ज्ञान

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१
अर्जुनविषादयोग अर्जुन विषाद योग · ४७ श्लोक अर्जुन का युद्धभूमि में मोह और विषाद।
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२
सांख्ययोग ज्ञान योग · ७२ श्लोक आत्मा की अमरता और निष्काम कर्मयोग का परिचय।
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३
कर्मयोग कर्म योग · ४३ श्लोक निष्काम कर्म और कर्तव्य पालन का महत्व।
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४
ज्ञानकर्मसंन्यासयोग ज्ञान-कर्म-संन्यास योग · ४२ श्लोक ज्ञान सहित कर्म और अवतार का रहस्य।
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५
कर्मसंन्यासयोग कर्म संन्यास योग · २९ श्लोक कर्म और संन्यास में समन्वय।
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६
आत्मसंयमयोग ध्यान योग · ४७ श्लोक ध्यान और मन के संयम का मार्ग।
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७
ज्ञानविज्ञानयोग ज्ञान-विज्ञान योग · ३० श्लोक ज्ञान और विज्ञान सहित ईश्वर का स्वरूप।
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८
अक्षरब्रह्मयोग अक्षर ब्रह्म योग · २८ श्लोक अक्षर ब्रह्म और अंतकाल की गति।
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९
राजविद्याराजगुह्ययोग राजविद्या-राजगुह्य योग · ३४ श्लोक सर्वोत्तम गुह्य ज्ञान और भक्ति की महिमा।
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१०
विभूतियोग विभूति योग · ४२ श्लोक ईश्वर की दिव्य विभूतियों का वर्णन।
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११
विश्वरूपदर्शनयोग विश्वरूप दर्शन योग · ५५ श्लोक भगवान के विराट विश्वरूप का दर्शन।
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१२
भक्तियोग भक्ति योग · २० श्लोक भक्ति का मार्ग और श्रेष्ठ भक्त के लक्षण।
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१३
क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग · ३५ श्लोक क्षेत्र (शरीर) और क्षेत्रज्ञ (आत्मा) का विवेक।
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१४
गुणत्रयविभागयोग गुणत्रय विभाग योग · २७ श्लोक प्रकृति के तीन गुण — सत्व, रज और तम।
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१५
पुरुषोत्तमयोग पुरुषोत्तम योग · २० श्लोक पुरुषोत्तम — परम पुरुष का ज्ञान।
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१६
दैवासुरसम्पद्विभागयोग दैवासुर सम्पद विभाग योग · २४ श्लोक दैवी और आसुरी संपदा का भेद।
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१७
श्रद्धात्रयविभागयोग श्रद्धात्रय विभाग योग · २८ श्लोक श्रद्धा के तीन प्रकार और उनका फल।
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१८
मोक्षसंन्यासयोग मोक्ष संन्यास योग · ७८ श्लोक संन्यास और त्याग द्वारा मोक्ष — गीता का सार।
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