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श्री हनुमान चालीसा

गोस्वामी तुलसीदास रचित

🔊 Audio Available ⏱ 10 मिनट 📖 हिंदी | संस्कृत ⭐ 25M+ पाठ
हनुमान चालीसा देववाणी Official ✔
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॥ श्रीगुरु चरन सरोज रज ॥

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि ।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि ॥

॥ दोहा ॥

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार ।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार ॥

॥ चौपाई ॥

1जय हनुमान ज्ञान गुन सागर । जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥

2राम दूत अतुलित बल धामा । अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा ॥

3महाबीर बिक्रम बजरंगी । कुमति निवार सुमति के संगी ॥

4कंचन बरन बिराज सुबेसा । कानन कुंडल कुंचित केसा ॥

5हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै । काँधे मूँज जनेऊ साजै ॥

6शंकर सुवन केसरी नंदन । तेज प्रताप महा जग बंदन ॥

7विद्यावान गुनी अति चातुर । राम काज करिबे को आतुर ॥

8प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । राम लखन सीता मन बसिया ॥

9सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा । बिकट रूप धरि लंक जरावा ॥

10भीम रूप धरि असुर सँहारे । रामचंद्र के काज सँवारे ॥

11लाय सजीवन लखन जियाए । श्रीरघुबीर हरषि उर लाए ॥

12रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई । तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥

13सहस बदन तुम्हरो जस गावैं । अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं ॥

14सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा । नारद सारद सहित अहीसा ॥

15जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते । कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥

16तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा । राम मिलाय राज पद दीन्हा ॥

17तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना । लंकेश्वर भए सब जग जाना ॥

18जुग सहस्र जोजन पर भानू । लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥

19प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं । जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥

20दुर्गम काज जगत के जेते । सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥

21राम दुआरे तुम रखवारे । होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥

22सब सुख लहै तुम्हारी सरना । तुम रक्षक काहू को डर ना ॥

23आपन तेज सम्हारो आपै । तीनों लोक हाँक तें काँपै ॥

24भूत पिसाच निकट नहिं आवै । महाबीर जब नाम सुनावै ॥

25नासै रोग हरै सब पीरा । जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥

26संकट तें हनुमान छुड़ावै । मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥

27सब पर राम तपस्वी राजा । तिन के काज सकल तुम साजा ॥

28और मनोरथ जो कोई लावै । सोइ अमित जीवन फल पावै ॥

29चारों जुग परताप तुम्हारा । है परसिद्ध जगत उजियारा ॥

30साधु संत के तुम रखवारे । असुर निकंदन राम दुलारे ॥

31अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता । अस बर दीन्ह जानकी माता ॥

32राम रसायन तुम्हरे पासा । सदा रहो रघुपति के दासा ॥

33तुम्हरे भजन राम को पावै । जनम जनम के दुख बिसरावै ॥

34अंत काल रघुबर पुर जाई । जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई ॥

35और देवता चित्त न धरई । हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ॥

36संकट कटै मिटै सब पीरा । जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥

37जै जै जै हनुमान गोसाईं । कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥

38जो सत बार पाठ कर कोई । छूटहि बंदि महा सुख होई ॥

39जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा । होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥

40तुलसीदास सदा हरि चेरा । कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥

॥ दोहा ॥

पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप ।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ॥

अक्षर

✦ हनुमान चालीसा पढ़ने का महत्व ✦

🛡️संकटों से रक्षा

हनुमान चालीसा पढ़ने से सभी प्रकार के संकट और बाधाएँ दूर होती हैं।

💪शारीरिक व मानसिक बल

यह पाठ शरीर में बल, साहस और मन में आत्मविश्वास बढ़ाता है।

🪷मन की शांति

नियमित पाठ करने से मन शांत होता है और तनाव दूर होता है।

📖बुद्धि और विद्या

विद्यार्थियों के लिए यह पाठ बुद्धि, एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ाता है।

☀️सकारात्मक ऊर्जा

नकारात्मक विचारों और शक्तियों का नाश करता है।

🙏भक्ति और कृपा

हनुमान जी की कृपा से जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता आती है।

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जो हनुमान चालीसा का नित्य पाठ करता है,
हनुमान जी उसकी रक्षा स्वयं करते हैं।

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