हनुमान चालीसा गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित चालीस चौपाइयों की स्तुति है। इसका नियमित पाठ भय, चिंता और मानसिक अशांति दूर करने वाला माना गया है। नीचे पाठ की पूरी विधि, सही समय और वे नियम दिए गए हैं जिनका ध्यान रखना चाहिए।
पाठ का सही समय
शास्त्रों में ब्रह्म मुहूर्त — प्रातः लगभग 4 से 6 बजे का समय — साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। इस समय मन स्वाभाविक रूप से एकाग्र रहता है। यदि प्रातः संभव न हो तो सायंकाल सूर्यास्त के बाद दीपक जलाकर पाठ किया जा सकता है। रात्रि में पाठ करने पर उसे शयन से पूर्व पूर्ण कर लेना चाहिए।
पाठ से पहले की तैयारी
- स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें — लाल या पीले वस्त्र शुभ माने जाते हैं।
- पूजा स्थान को स्वच्छ करें और हनुमान जी की प्रतिमा अथवा चित्र स्थापित करें।
- घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं और चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर अर्पित करें।
- गुड़-चना, बूंदी के लड्डू अथवा केले का भोग रखें।
- आसन के रूप में ऊन या कुश का प्रयोग करें, सीधे भूमि पर न बैठें।
पाठ की विधि
सबसे पहले भगवान श्रीराम का स्मरण करें, क्योंकि हनुमान जी को राम नाम सर्वाधिक प्रिय है। इसके बाद दोहा — “श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि” — से आरंभ करें और क्रमशः चालीसों चौपाइयों का शुद्ध उच्चारण करते हुए पाठ करें। अंत में दोहा “पवनतनय संकट हरन” पढ़कर हनुमान जी की आरती करें और भोग अर्पित करें।
पाठ के दौरान मन को एकाग्र रखें। जल्दबाजी में अशुद्ध उच्चारण करने की अपेक्षा धीमी गति से शुद्ध पाठ करना अधिक फलदायी माना गया है।
मंगलवार और शनिवार का विशेष महत्व
मंगलवार हनुमान जी का प्रमुख दिन है — इस दिन पाठ करने से साहस और आत्मबल की वृद्धि मानी जाती है। शनिवार को पाठ करने से शनि की पीड़ा शांत होने की मान्यता है, क्योंकि शास्त्रीय कथा के अनुसार शनिदेव ने हनुमान जी को वचन दिया था कि उनके भक्तों को वे कष्ट नहीं देंगे।
ध्यान रखने योग्य नियम
- पाठ आरंभ करने से पहले संकल्प लें कि कितने दिन नियमित पाठ करना है।
- मांस, मदिरा एवं तामसिक भोजन से दूर रहें।
- पाठ बीच में छोड़कर न उठें — एक बार आरंभ करने पर पूर्ण करें।
- स्त्रियाँ मासिक धर्म के दिनों में मानसिक जप कर सकती हैं।
- प्रतिमा पर चढ़ाया सिंदूर स्वयं भी मस्तक पर लगाएं — इसे शुभ माना जाता है।