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तुलसी विवाह 2026: विधि, मुहूर्त और महत्व

✍ vinodvinod.rawat@gmail.com 3 मिनट पढ़ें

संक्षेप में

तुलसी विवाह 2026 में 17 नवंबर को है। कार्तिक शुक्ल एकादशी से द्वादशी के बीच तुलसी जी का विवाह भगवान शालिग्राम से कराया जाता है। यही वह दिन है जब चातुर्मास समाप्त होकर विवाह एवं मांगलिक कार्यों का शुभारंभ होता है।

तुलसी विवाह देवउठनी एकादशी के आसपास किया जाता है, जब भगवान विष्णु चार माह की योगनिद्रा से जागते हैं। 2026 में तुलसी विवाह 17 नवंबर को है। इसी के साथ चातुर्मास का समापन होता है और विवाह, गृह प्रवेश एवं अन्य मांगलिक कार्य पुनः आरंभ हो जाते हैं।

कथा का आधार

कथा के अनुसार वृंदा भगवान विष्णु की परम भक्त एवं जालंधर की पत्नी थी। उसके पातिव्रत्य के बल पर जालंधर अजेय था। देवताओं की रक्षा हेतु विष्णु को छल का आश्रय लेना पड़ा, जिससे वृंदा का पातिव्रत्य भंग हुआ और जालंधर मारा गया। वृंदा ने विष्णु को पत्थर बन जाने का शाप दिया — वही शालिग्राम स्वरूप कहलाया। पश्चात्ताप स्वरूप विष्णु ने वरदान दिया कि वृंदा तुलसी के रूप में सदा पूजनीय रहेगी और उनकी पूजा तुलसी दल के बिना पूर्ण नहीं मानी जाएगी।

विवाह की विधि

  • आँगन में तुलसी के गमले को स्वच्छ कर मंडप सजाएँ — गन्ने से चार खंभे बनाकर ऊपर चुनरी बाँधी जाती है।
  • तुलसी जी को लाल चुनरी, चूड़ी, बिंदी एवं शृंगार सामग्री अर्पित करें।
  • शालिग्राम अथवा भगवान विष्णु की प्रतिमा को धोती-अंगवस्त्र पहनाकर तुलसी के समीप स्थापित करें।
  • दोनों के बीच मौली बाँधकर विवाह का संकल्प लें।
  • मंगलाष्टक अथवा विवाह के मंगल गीत गाए जाते हैं और गठबंधन कर सात परिक्रमा कराई जाती है।
  • आरती कर प्रसाद वितरित करें — प्रायः आँवला, बेर, गन्ना एवं मिष्ठान्न चढ़ाया जाता है।

कन्यादान की परंपरा

जिन दंपतियों की संतान न हो, अथवा जो कन्यादान का पुण्य चाहते हैं, वे तुलसी विवाह में कन्यादान की भूमिका निभाते हैं। शास्त्रों में इसे कन्यादान के समान फलदायी बताया गया है — यही कारण है कि यह आयोजन अनेक घरों में पूरे विवाह उत्सव की तरह किया जाता है।

तुलसी की देखभाल के नियम

  • एकादशी, रविवार एवं सूर्यास्त के बाद तुलसी पत्र नहीं तोड़े जाते।
  • तुलसी को प्रतिदिन जल अर्पित करें, किंतु एकादशी को जल नहीं चढ़ाया जाता (व्रत की मान्यता)।
  • सूखी तुलसी को फेंका नहीं जाता — उसे जल में प्रवाहित किया जाता है।
  • संध्या को तुलसी के समीप दीपक जलाना शुभ माना जाता है।

इस दिन का व्यावहारिक महत्व

तुलसी विवाह के बाद विवाह मुहूर्तों का सीजन आरंभ होता है — नवंबर से दिसंबर के बीच सबसे अधिक शुभ लग्न इसी अवधि में पड़ते हैं। इसीलिए इस तिथि की प्रतीक्षा केवल धार्मिक नहीं, व्यावहारिक रूप से भी की जाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तुलसी विवाह 2026 में कब है?

तुलसी विवाह 2026 में 17 नवंबर को है। यह देवउठनी एकादशी के आसपास किया जाता है।

तुलसी विवाह घर पर कैसे करें?

तुलसी के गमले को सजाकर मंडप बनाएँ, शालिग्राम अथवा विष्णु प्रतिमा स्थापित करें, गठबंधन कर सात परिक्रमा कराएँ और आरती के बाद प्रसाद बाँटें।

तुलसी विवाह के बाद ही विवाह क्यों होते हैं?

चातुर्मास में भगवान विष्णु योगनिद्रा में माने जाते हैं, इसलिए मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। देवउठनी एकादशी एवं तुलसी विवाह के साथ यह अवधि समाप्त होती है और विवाह मुहूर्त पुनः आरंभ हो जाते हैं।

तुलसी पत्र कब नहीं तोड़ना चाहिए?

एकादशी, रविवार, सूर्यास्त के बाद तथा बिना स्नान किए तुलसी पत्र नहीं तोड़ने की परंपरा है।

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