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दशहरा 2026: विजयादशमी पूजा विधि, शस्त्र पूजन और शुभ मुहूर्त

✍ vinodvinod.rawat@gmail.com 5 मिनट पढ़ें

संक्षेप में

दशहरा 2026 मंगलवार 20 अक्टूबर को है। विजयादशमी पर अपराह्न काल में शस्त्र एवं वाहन पूजन, अपराजिता पूजा तथा शमी वृक्ष की पूजा की जाती है। यह दिन अबूझ मुहूर्त माना जाता है, अर्थात नया कार्य आरंभ करने के लिए अलग से मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती।

विजयादशमी आश्विन शुक्ल दशमी को मनाई जाती है — वही दिन जब भगवान राम ने रावण का वध किया और माँ दुर्गा ने महिषासुर का। 2026 में दशहरा 20 अक्टूबर, मंगलवार को है। नवरात्रि के नौ दिनों की पूर्णाहुति इसी दिन होती है।

पूजा का सही समय

विजयादशमी की पूजा अपराह्न काल में की जाती है — अर्थात दोपहर बाद का वह समय जब दशमी तिथि विद्यमान हो। शास्त्रों में इसे “विजय मुहूर्त” कहा गया है, जो सूर्योदय से लगभग दसवें मुहूर्त में आता है और नए कार्य के शुभारंभ के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। समय हर नगर के सूर्योदय से बदलता है, इसलिए स्थानीय पंचांग देखें।

शस्त्र एवं वाहन पूजन की विधि

  • शस्त्र, औजार, वाहन अथवा व्यापार के उपकरणों को स्वच्छ कर एक स्थान पर रखें।
  • उन पर गंगाजल छिड़ककर हल्दी-कुमकुम से तिलक करें।
  • पुष्प, अक्षत एवं शमी पत्र अर्पित करें।
  • धूप-दीप दिखाकर आरती करें और गुड़ अथवा मिष्ठान्न का भोग लगाएँ।
  • कारीगर एवं व्यापारी अपने औजारों की पूजा इसी दिन करते हैं — इसे आयुध पूजा कहते हैं।

शमी पूजा और अपराजिता पूजन

परंपरा है कि पांडवों ने अज्ञातवास से पूर्व अपने शस्त्र शमी वृक्ष में छिपाए थे और विजयादशमी को ही उन्हें पुनः धारण किया। इसीलिए इस दिन शमी वृक्ष की पूजा कर उसके पत्ते एक-दूसरे को “सोना” कहकर दिए जाते हैं। साथ ही देवी अपराजिता का पूजन किया जाता है, जिनका अर्थ ही है — जो कभी पराजित न हों।

अबूझ मुहूर्त क्यों कहलाता है

वर्ष में कुछ ही तिथियाँ ऐसी हैं जिनमें कोई भी शुभ कार्य बिना मुहूर्त देखे आरंभ किया जा सकता है — विजयादशमी उनमें प्रमुख है। इसीलिए इस दिन गृह प्रवेश, नया व्यापार, वाहन खरीद, बच्चों की अक्षर आरंभ (विद्यारंभ) एवं नई विद्या का शुभारंभ बड़ी संख्या में किया जाता है।

क्षेत्रीय परंपराएँ

उत्तर भारत में रामलीला के समापन पर रावण दहन होता है। मैसूर का दशहरा अपनी भव्य शोभायात्रा के लिए विश्व प्रसिद्ध है। बंगाल में इसी दिन दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन होता है और सिंदूर खेला की परंपरा निभाई जाती है। कुल्लू का दशहरा दशमी के दिन से आरंभ होकर सात दिन चलता है।

इस दिन क्या करें

  • प्रातः स्नान कर नए या स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • घर के मुख्य द्वार पर बंदनवार लगाएँ और रंगोली बनाएँ।
  • अपराह्न में शस्त्र/वाहन/उपकरण पूजन करें।
  • शमी वृक्ष की पूजा करें अथवा शमी पत्र घर लाएँ।
  • बड़ों का आशीर्वाद लें और मिष्ठान्न बाँटें।
  • नीलकंठ पक्षी का दर्शन इस दिन शुभ माना जाता है।

रावण दहन की परंपरा

उत्तर भारत में नवरात्रि के नौ दिन रामलीला का मंचन होता है और दशमी की संध्या को रावण, कुंभकर्ण एवं मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है। यह केवल विजय का उत्सव नहीं, बल्कि प्रतीकात्मक रूप से अपने भीतर के अहंकार, क्रोध और मोह को जलाने का संकल्प माना जाता है। दहन सदैव सूर्यास्त के बाद, प्रदोष काल में किया जाता है।

सीमोल्लंघन और विद्यारंभ

सीमोल्लंघन अर्थात सीमा लाँघना — परंपरा में राजा एवं सेनाएँ विजयादशमी को गाँव की सीमा पार कर अभियान आरंभ करते थे, क्योंकि यह दिन विजय का सूचक माना जाता है। आज भी अनेक क्षेत्रों में लोग इस दिन गाँव की सीमा पर जाकर शमी अथवा अपराजिता की पूजा करते हैं।

विद्यारंभ — दक्षिण एवं पूर्वी भारत में बच्चों को इसी दिन पहला अक्षर लिखाया जाता है। इसे “अक्षराभ्यास” कहते हैं और चावल अथवा रेत पर उँगली से अक्षर लिखवाकर शिक्षा का शुभारंभ किया जाता है।

आयुध पूजा किन-किन चीज़ों की

  • किसान — हल, कुदाल एवं कृषि उपकरण
  • कारीगर — औजार, मशीनें
  • वाहन चालक — गाड़ी, जिसे धोकर फूल-माला से सजाया जाता है
  • विद्यार्थी — पुस्तकें एवं लेखन सामग्री
  • संगीतकार — वाद्य यंत्र
  • व्यापारी — बही-खाता, तराजू एवं दुकान के उपकरण

दक्षिण भारत में यह पूजा नवमी को होती है और उसे “आयुध पूजा” कहा जाता है; उत्तर भारत में दशमी को शस्त्र पूजन की परंपरा है।

दुर्गा विसर्जन और सिंदूर खेला

बंगाल, ओडिशा एवं असम में दशमी को माँ दुर्गा की विदाई होती है। विसर्जन से पहले विवाहित स्त्रियाँ देवी को सिंदूर, मिठाई एवं पान अर्पित कर सिंदूर खेला करती हैं — एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सौभाग्य की कामना की जाती है। इसके बाद प्रतिमा का विसर्जन होता है और लोग एक-दूसरे को “शुभो बिजोया” कहकर गले मिलते हैं।

इस दिन क्या खरीदना शुभ माना जाता है

चूँकि विजयादशमी अबूझ मुहूर्त है, इस दिन वाहन, सोना, सम्पत्ति एवं इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं की खरीद बड़ी संख्या में होती है। नए व्यापार का उद्घाटन, बैंक खाता खुलवाना अथवा किसी नए पाठ्यक्रम में प्रवेश भी इसी दिन शुभ माना जाता है। परंपरा में इस दिन झाड़ू, लोहा एवं तेल खरीदने से परहेज किया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दशहरा 2026 में कब है?

दशहरा अर्थात विजयादशमी 2026 में 20 अक्टूबर, मंगलवार को है। यह नवरात्रि के दसवें दिन पड़ता है।

दशहरा पूजा किस समय करनी चाहिए?

अपराह्न काल में, विजय मुहूर्त के दौरान। यह दोपहर बाद का समय होता है और हर नगर में सूर्योदय के अनुसार बदलता है।

क्या दशहरे पर नया काम शुरू करना शुभ है?

हाँ। विजयादशमी अबूझ मुहूर्त है — इस दिन गृह प्रवेश, वाहन खरीद, नया व्यापार या विद्यारंभ बिना अलग मुहूर्त देखे किया जा सकता है।

शमी के पत्ते का क्या महत्व है?

शमी को विजय का प्रतीक माना जाता है। पांडवों ने इसी वृक्ष में शस्त्र छिपाए थे, इसलिए विजयादशमी पर शमी पत्र एक-दूसरे को शुभकामना स्वरूप दिए जाते हैं।

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