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करवा चौथ 2026: व्रत विधि, पूजा सामग्री और चंद्रोदय

✍ vinodvinod.rawat@gmail.com 5 मिनट पढ़ें

संक्षेप में

करवा चौथ 2026 गुरुवार 29 अक्टूबर को है। यह निर्जला व्रत सूर्योदय से पूर्व सरगी खाकर आरंभ होता है, संध्या को करवा माता एवं गणेश जी की पूजा की जाती है, और चंद्रोदय के बाद छलनी से चंद्रमा एवं पति के दर्शन कर जल ग्रहण करते हुए व्रत पूर्ण होता है।

करवा चौथ कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष चतुर्थी को रखा जाने वाला व्रत है, जिसमें सुहागिन स्त्रियाँ पति की दीर्घायु के लिए दिनभर निर्जल रहती हैं। 2026 में यह व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार को है।

व्रत का पूरा क्रम

  • सरगी — सूर्योदय से पूर्व सास द्वारा दी गई सरगी (फल, मेवा, मिठाई, सेवइयाँ) ग्रहण की जाती है। तली-भुनी वस्तुओं की अपेक्षा फल एवं मेवा अधिक उपयुक्त रहते हैं।
  • संकल्प — स्नान के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है।
  • दिनभर — निर्जला व्रत रखा जाता है; स्वास्थ्य कारणों से आवश्यकता हो तो जल-फल लिया जा सकता है।
  • संध्या पूजा — प्रदोष काल में करवा माता, भगवान शिव-पार्वती, गणेश जी एवं कार्तिकेय का पूजन होता है।
  • कथा — करवा चौथ की कथा सुनी जाती है और करवे का आदान-प्रदान किया जाता है।
  • चंद्र दर्शन — चंद्रोदय के बाद छलनी से पहले चंद्रमा, फिर पति के दर्शन कर अर्घ्य दिया जाता है और पति के हाथों जल पीकर व्रत खोला जाता है।

पूजा सामग्री

  • मिट्टी या ताँबे का करवा एवं ढक्कन, छलनी
  • करवा माता का चित्र अथवा दीवार पर बना चित्र
  • रोली, अक्षत, मौली, कुमकुम, हल्दी, चंदन
  • दीपक, घी, धूप, कपूर
  • फल, मिठाई, मेवा एवं भोग सामग्री
  • सुहाग सामग्री — चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, मेहँदी
  • जल से भरा लोटा एवं गेहूँ या चावल

चंद्रोदय का समय

करवा चौथ का चंद्रोदय सामान्यतः रात्रि 8 बजे के आसपास होता है, किंतु समय हर शहर में अलग होता है — दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में इसमें आधे घंटे से अधिक का अंतर आ सकता है। इसलिए अपने नगर का चंद्रोदय समय पंचांग से देखें और उसी के अनुसार पूजा की तैयारी रखें।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • व्रत के दिन काले या सफेद वस्त्र नहीं पहने जाते; लाल, गुलाबी अथवा पीले वस्त्र शुभ माने जाते हैं।
  • पूजा प्रदोष काल में करना उत्तम है — सूर्यास्त के बाद और चंद्रोदय से पहले।
  • गर्भवती स्त्रियाँ एवं रोगी फलाहार सहित व्रत रख सकती हैं; स्वास्थ्य से ऊपर कोई नियम नहीं।
  • व्रत खोलने के बाद सात्विक भोजन लें — दिनभर निर्जल रहने के बाद अचानक भारी भोजन से बचें।

करवा चौथ की कथा

सबसे प्रचलित कथा रानी वीरवती की है। वीरवती अपने सात भाइयों की इकलौती बहन थी। विवाह के बाद उसने पहला करवा चौथ व्रत मायके में रखा। दिनभर निर्जल रहने से उसकी दशा देखकर भाइयों से रहा न गया, और उन्होंने पीपल के पीछे दर्पण से कृत्रिम चंद्रमा दिखाकर उसका व्रत खुलवा दिया। व्रत भंग होते ही उसे पति के अस्वस्थ होने का समाचार मिला। बाद में उसने पूरे विधि-विधान से पुनः व्रत किया और माँ पार्वती के आशीर्वाद से पति को जीवनदान मिला। कथा का भाव यही है कि व्रत का पालन श्रद्धा एवं नियम से होना चाहिए, दिखावे से नहीं।

दूसरी कथा महाभारत से जुड़ी है, जिसमें अर्जुन के तप पर गए होने पर द्रौपदी की चिंता दूर करने हेतु श्रीकृष्ण ने उन्हें यही व्रत बताया था।

सोलह शृंगार

करवा चौथ पर सुहागिनें सोलह शृंगार करती हैं — मेहँदी, बिंदी, सिंदूर, काजल, मंगलसूत्र, नथ, कर्णफूल, चूड़ियाँ, बाजूबंद, अँगूठी, कमरबंद, पायल, बिछिया, गजरा, महावर एवं वस्त्र। मेहँदी एक दिन पूर्व लगाई जाती है, और मान्यता है कि उसका रंग जितना गहरा हो, दांपत्य उतना ही मधुर होता है। आयुर्वेदिक दृष्टि से मेहँदी शीतलता देती है, जो निर्जला व्रत के दिन उपयोगी मानी जाती है।

व्रत खोलने के बाद क्या लें

दिनभर निर्जल रहने के बाद पाचन तंत्र संवेदनशील रहता है, इसलिए क्रम इस प्रकार रखें:

  • सबसे पहले थोड़ा जल — एक साथ अधिक नहीं।
  • फिर मीठा — मिठाई का छोटा टुकड़ा या खजूर।
  • इसके बाद हल्का भोजन — दाल-चावल, खिचड़ी या सब्जी-रोटी।
  • तला-भुना, अधिक मिर्च-मसाला एवं चाय-कॉफी उसी समय लेने से बचें।

पूजा की थाली में क्या रखें

थाली में जल से भरा करवा, ढक्कन में चावल या गेहूँ, दीपक, रोली, अक्षत, मिठाई, फल, छलनी एवं करवा माता का चित्र रखा जाता है। परिवार की स्त्रियाँ एक साथ बैठकर थाली फेरते हुए कथा सुनती हैं और करवे का आदान-प्रदान करती हैं — यह परंपरा सामूहिकता एवं आपसी स्नेह का प्रतीक है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

करवा चौथ 2026 कब है?

करवा चौथ 2026 में 29 अक्टूबर, गुरुवार को है। व्रत सूर्योदय से पूर्व सरगी के साथ आरंभ होकर चंद्रोदय के बाद पूर्ण होता है।

सरगी में क्या खाना चाहिए?

फल, सूखे मेवे, दूध से बनी मिठाई, नारियल पानी और सेवइयाँ उपयुक्त हैं। तली हुई एवं अधिक नमक वाली वस्तुओं से बचें, क्योंकि उनसे दिनभर प्यास अधिक लगती है।

क्या अविवाहित लड़कियाँ करवा चौथ का व्रत रख सकती हैं?

हाँ, अनेक क्षेत्रों में अविवाहित कन्याएँ भी यह व्रत रखती हैं। वे चंद्रमा के स्थान पर तारों को अर्घ्य देकर व्रत पूर्ण करती हैं।

चंद्रमा दिखाई न दे तो व्रत कैसे खोलें?

बादल होने पर चंद्रोदय के समय के बाद उसी दिशा में चंद्रमा का ध्यान कर अर्घ्य दिया जाता है और व्रत पूर्ण किया जाता है।

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