🪔 व्रत एवं त्योहार

अहोई अष्टमी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि और तारों का समय

✍ vinodvinod.rawat@gmail.com 3 मिनट पढ़ें

संक्षेप में

अहोई अष्टमी 2026 रविवार 1 नवंबर को है। यह व्रत माताएँ संतान की लंबी आयु एवं कुशलता के लिए रखती हैं। दिनभर निर्जल रहकर संध्या को अहोई माता की पूजा की जाती है और तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है — कुछ परिवारों में चंद्रोदय तक प्रतीक्षा की परंपरा है।

अहोई अष्टमी कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी को रखी जाती है, जो दीपावली से लगभग एक सप्ताह पूर्व आती है। 2026 में यह व्रत 1 नवंबर, रविवार को है। करवा चौथ जहाँ पति के लिए है, वहीं अहोई अष्टमी संतान के लिए रखी जाती है।

व्रत की विधि

  • प्रातः स्नान कर संतान की कुशलता का संकल्प लें।
  • दीवार पर अथवा कागज पर अहोई माता का चित्र बनाएँ — परंपरागत रूप से आठ कोनों वाली आकृति बनाई जाती है, जिसमें सेह (साही) और उसके बच्चे भी चित्रित होते हैं।
  • चित्र के समक्ष जल से भरा कलश रखें और रोली, अक्षत, दूध-चावल अर्पित करें।
  • चाँदी की अहोई (माला) हो तो उसका पूजन करें; कई परिवारों में प्रत्येक संतान के जन्म पर एक मोती जोड़ने की परंपरा है।
  • संध्या को अहोई अष्टमी की कथा सुनें।
  • तारों को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें।

व्रत कथा

कथा के अनुसार एक साहूकार की पत्नी दीपावली से पूर्व घर लीपने के लिए मिट्टी लेने खदान गई। खुदाई करते समय अनजाने में उसके हाथों सेह (साही) के बच्चे की मृत्यु हो गई। इस अनजाने पाप से उसकी अपनी संतानें भी नहीं रहीं। दुःखी होकर उसने वृद्धजनों से उपाय पूछा, तो उन्होंने अहोई माता (सेह की माता) की पूजा एवं व्रत का विधान बताया। उसने श्रद्धापूर्वक व्रत किया और अहोई माता की कृपा से उसे संतान सुख पुनः प्राप्त हुआ।

कथा का भाव यह है कि अनजाने में हुई भूल का प्रायश्चित श्रद्धा और संकल्प से संभव है।

तारों को अर्घ्य कैसे दें

संध्या में जब आकाश में तारे दिखने लगें, तब लोटे में जल लेकर तारों की ओर मुख कर अर्घ्य दिया जाता है। अर्घ्य देते समय संतान की दीर्घायु की प्रार्थना की जाती है। कुछ क्षेत्रों — विशेषकर पंजाब एवं हरियाणा में — चंद्रोदय तक प्रतीक्षा कर चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा भी है। परिवार की परंपरा के अनुसार निर्णय करें।

पूजा सामग्री

  • अहोई माता का चित्र अथवा चाँदी की अहोई
  • जल से भरा कलश, लोटा
  • रोली, अक्षत, दूध, चावल, मौली
  • दीपक, धूप, कपूर
  • सिंघाड़े, मूली, ऋतु फल एवं मिष्ठान्न का भोग
  • सास को देने हेतु बायना (वस्त्र, मिठाई एवं दक्षिणा)

ध्यान रखने योग्य बातें

  • व्रत के दिन मिट्टी खोदना वर्जित माना जाता है — कथा का यही मूल संदर्भ है।
  • पूजा में सेह एवं उसके बच्चों का चित्र अवश्य बनाया जाता है।
  • व्रत खोलने के बाद सास अथवा बड़ी महिला को बायना देकर आशीर्वाद लिया जाता है।
  • स्वास्थ्य ठीक न हो तो फलाहार सहित व्रत रखा जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अहोई अष्टमी 2026 कब है?

अहोई अष्टमी 2026 में 1 नवंबर, रविवार को है। यह दीपावली से लगभग एक सप्ताह पहले आती है।

अहोई अष्टमी का व्रत कौन रखता है?

यह व्रत माताएँ अपनी संतान की दीर्घायु एवं कुशलता के लिए रखती हैं। संतान की कामना रखने वाली स्त्रियाँ भी यह व्रत करती हैं।

व्रत तारों से खोलें या चंद्रमा से?

अधिकांश क्षेत्रों में तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है। पंजाब-हरियाणा में चंद्रोदय तक प्रतीक्षा की परंपरा है। अपने परिवार की परंपरा का पालन करें।

क्या अहोई अष्टमी पर निर्जला व्रत आवश्यक है?

परंपरा निर्जला व्रत की है, किंतु स्वास्थ्य कारणों से फलाहार सहित व्रत रखना भी मान्य है।

साझा करें ✆ f ✦