भगवान शिव देवों के देव महादेव हैं। "ॐ जय शिव ओंकारा" पं. शिवानन्द द्वारा रचित शिवजी की सर्वप्रिय आरती है, जो सोमवार तथा महाशिवरात्रि पर विशेष रूप से गाई जाती है। नीचे इसका शुद्ध एवं सम्पूर्ण पाठ दिया गया है। श्रद्धापूर्वक शिव आरती करने से मन को शांति, रोग-दोष से मुक्ति और महादेव की कृपा प्राप्त होती है।
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥
॥ ॐ जय शिव ओंकारा ॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥
॥ ॐ जय शिव ओंकारा ॥
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज ते सोहे ।
तीनों रूप निरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥
॥ ॐ जय शिव ओंकारा ॥
अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी ।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी ॥
॥ ॐ जय शिव ओंकारा ॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे ॥
॥ ॐ जय शिव ओंकारा ॥
कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगहर्ता जगपालनकर्ता ॥
॥ ॐ जय शिव ओंकारा ॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका ॥
॥ ॐ जय शिव ओंकारा ॥
त्रिगुण स्वामीजी की आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी सुख सम्पति पावे ॥
॥ ॐ जय शिव ओंकारा ॥
शिव आरती कब करनी चाहिए?
प्रातः स्नान के बाद और संध्या के समय — दोनों शुभ हैं। सोमवार शिवजी को विशेष प्रिय है, और प्रदोष काल (सूर्यास्त से लगभग डेढ़ घंटा पहले) में की गई आरती का विशेष महत्व माना गया है।
शिव जी की आरती किसने लिखी है?
"जय शिव ओंकारा" आरती पं. रामदास जी द्वारा रचित मानी जाती है। यह पूरे भारत में शिव मंदिरों एवं घरों में समान रूप से गाई जाती है।
शिव आरती में कौन-सी सामग्री चाहिए?
दीपक, धूप, पुष्प, बेलपत्र, जल अथवा दूध, अक्षत और चंदन। बेलपत्र शिवजी को सर्वाधिक प्रिय है — तीन पत्तियों वाला और बिना कटा-फटा चुनें।
शिव जी को क्या नहीं चढ़ाना चाहिए?
केतकी का फूल, तुलसी दल, हल्दी, कुमकुम और शंख से जल — परंपरा में ये शिव पूजा में वर्जित माने गए हैं। जल, दूध, बेलपत्र और सफेद पुष्प सर्वोत्तम हैं।
क्या शिव आरती रोज़ कर सकते हैं?
हाँ, नित्य आरती का कोई निषेध नहीं है और यही सबसे उत्तम माना गया है। सोमवार एवं महाशिवरात्रि पर इसका विशेष महत्व है।