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श्री शिव चालीसा

अयोध्यादास रचित

🔊 ऑडियो उपलब्ध⏱ 9 मिनट📖 हिंदी🔱 सावन/सोमवार विशेष

श्री शिव चालीसा भगवान महादेव की महिमा एवं लीलाओं का वर्णन करने वाला चालीस चौपाइयों का पावन पाठ है, जिसकी रचना अयोध्यादास जी ने की। सोमवार तथा सावन मास में इसका पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है। नीचे शिव चालीसा का शुद्ध एवं सम्पूर्ण पाठ दिया गया है। श्रद्धापूर्वक नित्य पाठ करने से रोग, संकट एवं कष्ट दूर होकर भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।

॥ दोहा ॥

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान ।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान ॥

॥ चौपाई ॥

1जय गिरिजा पति दीन दयाला । सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥

2भाल चन्द्रमा सोहत नीके । कानन कुण्डल नागफनी के ॥

3अंग गौर शिर गंग बहाये । मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥

4वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे । छवि को देखि नाग मन मोहे ॥

5मैना मातु की हवे दुलारी । बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥

6कर त्रिशूल सोहत छवि भारी । करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥

7नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे । सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥

8कार्तिक श्याम और गणराऊ । या छवि को कहि जात न काऊ ॥

9देवन जबहीं जाय पुकारा । तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥

10किया उपद्रव तारक भारी । देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥

11तुरत षडानन आप पठायउ । लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ॥

12आप जलंधर असुर संहारा । सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥

13त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई । सबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥

14किया तपहिं भागीरथ भारी । पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥

15दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं । सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥

16वेद नाम महिमा तव गाई । अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥

17प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला । जरत सुरासुर भए विहाला ॥

18कीन्ही दया तहं करी सहाई । नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥

19पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा । जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥

20सहस कमल में हो रहे धारी । कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥

21एक कमल प्रभु राखेउ जोई । कमल नयन पूजन चहं सोई ॥

22कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर । भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥

23जय जय जय अनन्त अविनाशी । करत कृपा सब के घटवासी ॥

24दुष्ट सकल नित मोहि सतावै । भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥

25त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो । येहि अवसर मोहि आन उबारो ॥

26लै त्रिशूल शत्रुन को मारो । संकट से मोहि आन उबारो ॥

27मात-पिता भ्राता सब होई । संकट में पूछत नहिं कोई ॥

28स्वामी एक है आस तुम्हारी । आय हरहु मम संकट भारी ॥

29धन निर्धन को देत सदा हीं । जो कोई जांचे सो फल पाहीं ॥

30अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी । क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥

31शंकर हो संकट के नाशन । मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥

32योगी यति मुनि ध्यान लगावैं । शारद नारद शीश नवावैं ॥

33नमो नमो जय नमः शिवाय । सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥

34जो यह पाठ करे मन लाई । ता पर होत है शम्भु सहाई ॥

35ॠनियां जो कोई हो अधिकारी । पाठ करे सो पावन हारी ॥

36पुत्र हीन कर इच्छा जोई । निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥

37पण्डित त्रयोदशी को लावे । ध्यान पूर्वक होम करावे ॥

38त्रयोदशी व्रत करै हमेशा । ताके तन नहीं रहै कलेशा ॥

39धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे । शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥

40जन्म जन्म के पाप नसावे । अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥

41कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी । जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥

॥ दोहा ॥

नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा ।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश ॥

मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान ।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण ॥

✦ शिव चालीसा के लाभ ✦

🧘मन की शांति

शिव चालीसा के पाठ से मन शांत होता है और तनाव दूर होता है।

💪रोग-कष्ट नाश

रोग, कष्ट एवं संकटों का नाश होकर आरोग्य की प्राप्ति होती है।

🛡️नकारात्मकता नाश

नकारात्मक शक्तियों एवं बाधाओं से रक्षा होती है।

🙏शिव कृपा

नित्य पाठ से महादेव प्रसन्न होकर मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं।