महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत शक्तिशाली वैदिक मंत्र है, जिसे यजुर्वेद एवं ऋग्वेद में स्थान प्राप्त है। इसे "मृत्यु को जीतने वाला मंत्र" कहा जाता है। नीचे इसका संस्कृत पाठ, हिंदी अर्थ एवं जाप विधि दी गई है।
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ॥
हम त्रिनेत्रधारी भगवान शिव की आराधना करते हैं, जो सुगन्धित (सुयश युक्त) हैं और सम्पूर्ण जगत का पोषण करते हैं। जिस प्रकार पका हुआ खरबूजा (ककड़ी) अपनी बेल के बंधन से सहज ही अलग हो जाता है, उसी प्रकार वे हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें (मोक्ष प्रदान करें), किन्तु अमरत्व (मुक्ति) से हमें विमुख न करें।
सोमवार अथवा प्रदोष काल में स्नान करके स्वच्छ आसन पर बैठें। भगवान शिव अथवा शिवलिंग के समक्ष घी का दीपक जलाकर रुद्राक्ष की माला से मंत्र का जाप करें। कम से कम एक माला (108 बार) अथवा सामर्थ्य अनुसार अधिक जाप करें। रोग निवारण एवं संकट शांति हेतु सवा लाख जाप का अनुष्ठान श्रेष्ठ माना जाता है। शुद्ध उच्चारण एवं श्रद्धा आवश्यक है।