"ॐ नमः शिवाय" भगवान शिव का मूल एवं सर्वाधिक प्रिय पंचाक्षरी मंत्र है (पाँच अक्षर — न, म, शि, वा, य)। यह अत्यंत सरल किन्तु महान फलदायी मंत्र है। नीचे इसका पाठ, हिंदी अर्थ एवं जाप विधि दी गई है।
ॐ नमः शिवाय ॥
मैं भगवान शिव को नमन करता हूँ। "नमः शिवाय" का अर्थ है — कल्याणकारी शिव को प्रणाम। यह पंचाक्षरी मंत्र पाँच तत्वों एवं शिव की पंच शक्तियों का प्रतीक है, जो जीव को अहंकार से मुक्त कर शिव में लीन होने का मार्ग दिखाता है।
प्रातः अथवा सायं स्नान करके स्वच्छ आसन पर बैठें। भगवान शिव अथवा शिवलिंग का ध्यान करते हुए रुद्राक्ष की माला से मंत्र का जाप करें। कम से कम एक माला (108 बार) जाप करें; सोमवार एवं महाशिवरात्रि पर विशेष फलदायी है। जाप के समय मन शांत रखें और प्रत्येक अक्षर का शुद्ध उच्चारण करें। इस मंत्र का जाप किसी भी समय, किसी भी अवस्था में किया जा सकता है।
ॐ नमः शिवाय का अर्थ क्या है?
"शिव को नमन" — इसे पंचाक्षर मंत्र कहा जाता है क्योंकि "नमः शिवाय" में पाँच अक्षर हैं। ये पाँच अक्षर पंचतत्वों के प्रतीक माने गए हैं।
यह मंत्र कितनी बार जपना चाहिए?
108 बार रुद्राक्ष की माला से। यह उन कुछ मंत्रों में है जिनका जाप किसी भी समय, किसी भी स्थिति में — चलते-फिरते भी — किया जा सकता है।
ॐ नमः शिवाय जाप का सही समय क्या है?
ब्रह्म मुहूर्त एवं प्रदोष काल सर्वोत्तम माने जाते हैं। सोमवार, प्रदोष तिथि और महाशिवरात्रि पर विशेष महत्व है।
क्या यह मंत्र बिना दीक्षा के जप सकते हैं?
हाँ। पंचाक्षर मंत्र सर्वसुलभ माना गया है और इसके जाप के लिए किसी विशेष दीक्षा की आवश्यकता नहीं बताई गई। शुद्ध उच्चारण एवं श्रद्धा पर्याप्त है।
जाप के लिए कौन-सी माला उपयुक्त है?
रुद्राक्ष की माला शिव उपासना के लिए सर्वोत्तम मानी गई है। माला दाहिने हाथ में, अंगूठे एवं मध्यमा की सहायता से फेरी जाती है और सुमेरु मणि को लाँघा नहीं जाता।