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श्री गणेश जी की आरती

पारंपरिक आरती

🔊 ऑडियो उपलब्ध⏱ 4 मिनट📖 हिंदी🐘 प्रथम पूज्य

श्री गणेश प्रथम पूज्य देव हैं — किसी भी शुभ कार्य का आरंभ उनकी वंदना से होता है। "जय गणेश जय गणेश देवा" गणपति की सबसे प्रसिद्ध आरती है, जो गणेश चतुर्थी सहित प्रत्येक पूजा में गाई जाती है। नीचे इसका शुद्ध एवं सम्पूर्ण पाठ दिया गया है। श्रद्धापूर्वक गणेश आरती करने से विघ्नों का नाश और बुद्धि-सिद्धि की प्राप्ति होती है।

॥ श्री गणेश जी की आरती ॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
॥ जय गणेश देवा ॥

एकदन्त दयावन्त, चार भुजा धारी ।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥
॥ जय गणेश देवा ॥

पान चढ़े फूल चढ़े, और चढ़े मेवा ।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥
॥ जय गणेश देवा ॥

अंधन को आँख देत, कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
॥ जय गणेश देवा ॥

'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
॥ जय गणेश देवा ॥

दीनन की लाज राखो, शम्भु सुतकारी ।
कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी ॥
॥ जय गणेश देवा ॥

✦ गणेश आरती के लाभ ✦

🚧विघ्न नाश

श्री गणेश की आरती से सभी बाधाएँ और विघ्न दूर होते हैं।

🧠बुद्धि एवं विवेक

गणपति की कृपा से बुद्धि, विवेक और एकाग्रता बढ़ती है।

🌟शुभ आरंभ

हर नए कार्य में सफलता एवं मंगल की प्राप्ति होती है।

🙏सिद्धि-समृद्धि

रिद्धि-सिद्धि के दाता गणेश जी घर में समृद्धि लाते हैं।