श्री गणेश प्रथम पूज्य देव हैं और उनके मंत्र समस्त विघ्नों का नाश करने वाले माने जाते हैं। "ॐ गं गणपतये नमः" गणपति का मूल बीज मंत्र है, तथा "वक्रतुण्ड महाकाय" सर्वप्रसिद्ध गणेश श्लोक है जिसका उच्चारण हर शुभ कार्य के आरंभ में किया जाता है। नीचे इनका पाठ, हिंदी अर्थ एवं जाप विधि दी गई है।
ॐ गं गणपतये नमः ॥
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥
"ॐ गं गणपतये नमः" — गणों के स्वामी श्री गणेश को नमस्कार है ("गं" गणपति का बीजाक्षर है)। "वक्रतुण्ड महाकाय" श्लोक का अर्थ — हे वक्र (घुमावदार) सूँड़ वाले, विशाल कायावाले, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी देव! मेरे समस्त कार्यों को सदा निर्विघ्न रूप से पूर्ण कीजिए।
बुधवार अथवा किसी भी शुभ कार्य के आरंभ में स्नान करके स्वच्छ आसन पर पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। श्री गणेश की प्रतिमा अथवा चित्र के समक्ष दीप जलाकर लाल अथवा हल्दी की माला से मंत्र का जाप करें। कम से कम एक माला (108 बार) जाप करें। मोदक अथवा लड्डू का भोग अर्पित करें। शुद्ध उच्चारण एवं श्रद्धा आवश्यक है।