होमचालीसाश्री गणेश चालीसा

श्री गणेश चालीसा

पारंपरिक चालीसा

🔊 ऑडियो उपलब्ध⏱ 9 मिनट📖 हिंदी🐘 गणेश चतुर्थी विशेष

श्री गणेश चालीसा प्रथम पूज्य देव गणपति की महिमा एवं जन्म-कथा का वर्णन करने वाला पावन पाठ है। गणेश चतुर्थी तथा प्रत्येक बुधवार को इसका पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है। नीचे गणेश चालीसा का शुद्ध एवं सम्पूर्ण पाठ दिया गया है। श्रद्धापूर्वक नित्य पाठ करने से विघ्नों का नाश होकर बुद्धि, सिद्धि एवं सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

॥ दोहा ॥

जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल ।
विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल ॥

॥ चौपाई ॥

1जय जय जय गणपति गणराजू । मंगल भरण करण शुभः काजू ॥

2जै गजबदन सदन सुखदाता । विश्व विनायका बुद्धि विधाता ॥

3वक्र तुण्ड शुची शुण्ड सुहावना । तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन ॥

4राजत मणि मुक्तन उर माला । स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला ॥

5पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं । मोदक भोग सुगन्धित फूलं ॥

6सुन्दर पीताम्बर तन साजित । चरण पादुका मुनि मन राजित ॥

7धनि शिव सुवन षडानन भ्राता । गौरी लालन विश्व-विख्याता ॥

8ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे । मुषक वाहन सोहत द्वारे ॥

9कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी । अति शुची पावन मंगलकारी ॥

10एक समय गिरिराज कुमारी । पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी ॥

11भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा । तब पहुंच्यो तुम धरी द्विज रूपा ॥

12अतिथि जानी के गौरी सुखारी । बहुविधि सेवा करी तुम्हारी ॥

13अति प्रसन्न हवै तुम वर दीन्हा । मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा ॥

14मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला । बिना गर्भ धारण यहि काला ॥

15गणनायक गुण ज्ञान निधाना । पूजित प्रथम रूप भगवाना ॥

16अस कही अन्तर्धान रूप हवै । पालना पर बालक स्वरूप हवै ॥

17बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना । लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना ॥

18सकल मगन, सुखमंगल गावहिं । नाभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं ॥

19शम्भु, उमा, बहुदान लुटावहिं । सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं ॥

20लखि अति आनन्द मंगल साजा । देखन भी आये शनि राजा ॥

21निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं । बालक, देखन चाहत नाहीं ॥

22गिरिजा कछु मन भेद बढायो । उत्सव मोर, न शनि तुही भायो ॥

23कहत लगे शनि, मन सकुचाई । का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई ॥

24नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ । शनि सों बालक देखन कहयऊ ॥

25पदतहिं शनि दृग कोण प्रकाशा । बालक सिर उड़ि गयो अकाशा ॥

26गिरिजा गिरी विकल हवै धरणी । सो दुःख दशा गयो नहीं वरणी ॥

27हाहाकार मच्यौ कैलाशा । शनि कीन्हों लखि सुत को नाशा ॥

28तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो । काटी चक्र सो गज सिर लाये ॥

29बालक के धड़ ऊपर धारयो । प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो ॥

30नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे । प्रथम पूज्य बुद्धि निधि, वर दीन्हे ॥

31बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा । पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा ॥

32चले षडानन, भरमि भुलाई । रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई ॥

33चरण मातु-पितु के धर लीन्हें । तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें ॥

34धनि गणेश कही शिव हिये हरषे । नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे ॥

35तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई । शेष सहसमुख सके न गाई ॥

36मैं मतिहीन मलीन दुखारी । करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी ॥

37भजत रामसुन्दर प्रभुदासा । जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा ॥

38अब प्रभु दया दीना पर कीजै । अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै ॥

॥ दोहा ॥

श्री गणेश यह चालीसा, पाठ करै कर ध्यान ।
नित नव मंगल गृह बसै, लहे जगत सन्मान ॥

सम्बन्ध अपने सहस्त्र दश, ऋषि पंचमी दिनेश ।
पूरण चालीसा भयो, मंगल मूर्ती गणेश ॥

✦ गणेश चालीसा के लाभ ✦

🚧विघ्न नाश

गणेश चालीसा के पाठ से सभी बाधाएँ और विघ्न दूर होते हैं।

🧠बुद्धि एवं सिद्धि

बुद्धि, विवेक, एकाग्रता और सिद्धि की प्राप्ति होती है।

🌟शुभ आरंभ

हर नए कार्य में सफलता और मंगल की प्राप्ति होती है।

🙏सुख-समृद्धि

नित्य पाठ से घर में सुख, समृद्धि और सम्मान आता है।