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सर्व पितृ अमावस्या 2026: सबसे महत्वपूर्ण श्राद्ध तिथि

✍ vinodvinod.rawat@gmail.com 3 मिनट पढ़ें

संक्षेप में

सर्व पितृ अमावस्या 2026 में शनिवार 10 अक्टूबर को है। यह पितृ पक्ष का अंतिम दिन है और उन सभी पितरों का श्राद्ध इसी दिन किया जाता है जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं, या जिनका श्राद्ध किसी कारण छूट गया हो। इसे महालया अमावस्या भी कहा जाता है।

पितृ पक्ष की अंतिम तिथि — आश्विन अमावस्या — को सर्व पितृ अमावस्या अथवा महालया अमावस्या कहा जाता है। 2026 में यह 10 अक्टूबर, शनिवार को है। यदि पूरे पक्ष में केवल एक दिन श्राद्ध करना संभव हो, तो शास्त्र इसी दिन का विधान बताते हैं।

यह दिन सबसे महत्वपूर्ण क्यों

वर्ष भर में यह एकमात्र तिथि है जिस पर सभी पितरों का एक साथ श्राद्ध किया जा सकता है — चाहे उनकी मृत्यु किसी भी तिथि को हुई हो। विशेष रूप से यह दिन उनके लिए है:

  • जिनकी मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं है
  • जिनका श्राद्ध इस पक्ष में किसी कारण छूट गया
  • जिनकी मृत्यु अकाल अथवा दुर्घटना में हुई
  • जिनका इस संसार में कोई श्राद्ध करने वाला नहीं बचा
  • मातृ पक्ष एवं गुरु-आचार्य, जिनका अलग से श्राद्ध न किया गया हो

इस दिन की विधि

  • प्रातः स्नान कर, संभव हो तो किसी नदी अथवा सरोवर पर जाकर स्नान करें।
  • दक्षिण दिशा की ओर मुख कर जल, काले तिल एवं कुश से तर्पण करें।
  • सभी ज्ञात एवं अज्ञात पितरों का नाम एवं गोत्र स्मरण करते हुए जल अर्पित करें।
  • खीर, पूरी एवं मौसमी सब्जी बनाकर पंचबलि निकालें — गाय, कुत्ता, कौआ, देव एवं चींटी।
  • ब्राह्मण अथवा किसी जरूरतमंद को भोजन कराएँ और वस्त्र, अन्न व दक्षिणा दान करें।
  • संध्या को घर के मुख्य द्वार पर अथवा दक्षिण दिशा में सरसों के तेल का दीपक जलाएँ — इसे पितरों की विदाई का दीप माना जाता है।

दीपदान की परंपरा

मान्यता है कि पितृ पक्ष की समाप्ति पर पितर अपने लोक लौटते हैं, इसलिए संध्या को उनके मार्ग को प्रकाशित करने हेतु दीप जलाया जाता है। अनेक परिवारों में इस दिन घर की देहरी पर आटे का दीपक बनाकर रखा जाता है, और कुछ क्षेत्रों में पीपल के नीचे भी दीपदान किया जाता है।

महालया और दुर्गा पूजा का संबंध

बंगाल में इसी अमावस्या को महालया कहा जाता है और यह दुर्गा पूजा के आगमन की सूचना देती है। प्रातः रेडियो पर “महिषासुरमर्दिनी” का पाठ सुनने की परंपरा दशकों पुरानी है। मान्यता है कि इसी दिन माँ दुर्गा पृथ्वी की ओर प्रस्थान करती हैं — इसीलिए पितरों की विदाई और देवी के आगमन का यह संधि-दिवस माना जाता है। इसके अगले दिन से नवरात्रि की तैयारी आरंभ हो जाती है — 2026 में नवरात्रि 11 अक्टूबर से।

इस दिन क्या दान करें

  • अन्न — विशेषकर चावल, गेहूँ एवं उड़द
  • काले तिल एवं गुड़
  • वस्त्र एवं कंबल
  • जल पात्र अथवा छाता
  • यथाशक्ति दक्षिणा

दान का मूल भाव यही है कि जो पितरों के नाम पर दिया जाए, वह किसी जीवित व्यक्ति के काम आए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सर्व पितृ अमावस्या 2026 में कब है?

10 अक्टूबर 2026, शनिवार को। यह पितृ पक्ष का अंतिम दिन है।

क्या इस दिन सभी पितरों का श्राद्ध एक साथ हो सकता है?

हाँ, यही इस तिथि की विशेषता है। ज्ञात एवं अज्ञात — सभी पितरों का श्राद्ध इसी दिन एक साथ किया जा सकता है।

इस दिन दीपक कहाँ जलाएँ?

संध्या को घर के मुख्य द्वार पर अथवा दक्षिण दिशा में। सरसों के तेल का दीपक जलाने की परंपरा है।

महालया का अर्थ क्या है?

महालय अर्थात “महान आलय” — पितरों का महान निवास। बंगाल में यही दिन दुर्गा पूजा के आरंभ का संकेत माना जाता है।

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