🪔 व्रत एवं त्योहार

रविवार व्रत: सूर्य देव की पूजा विधि, अर्घ्य और नियम

✍ vinodvinod.rawat@gmail.com 3 मिनट पढ़ें

संक्षेप में

रविवार का व्रत भगवान सूर्य को समर्पित है और आरोग्य, यश तथा आत्मबल के लिए रखा जाता है। इस दिन सूर्योदय के समय ताँबे के लोटे से जल में रोली और लाल पुष्प डालकर अर्घ्य दिया जाता है, दिन में एक बार बिना नमक का भोजन लिया जाता है, और गेहूँ व गुड़ का दान शुभ माना जाता है।

रविवार भगवान सूर्य का दिन है। वेदों में सूर्य को प्रत्यक्ष देवता कहा गया है — जिन्हें प्रतिदिन देखा जा सकता है। ज्योतिष में सूर्य आत्मा, पिता, यश, नेतृत्व एवं आरोग्य का कारक है।

व्रत का उद्देश्य

यह व्रत नेत्र रोग, त्वचा विकार, हड्डी की दुर्बलता, आत्मविश्वास की कमी, पिता से मतभेद अथवा कार्यक्षेत्र में सम्मान न मिलने की स्थिति में किया जाता है। कुंडली में सूर्य कमजोर हो तो भी रविवार व्रत की सलाह दी जाती है।

अर्घ्य देने की सही विधि

  • सूर्योदय के समय स्नान कर लें — यही अर्घ्य का श्रेष्ठ समय है।
  • ताँबे के लोटे में जल लें और उसमें रोली, लाल पुष्प एवं अक्षत डालें।
  • पूर्व दिशा की ओर मुख कर, दोनों हाथों से लोटा सिर के ऊपर उठाकर धीरे-धीरे जल की धार गिराएँ।
  • धार में से सूर्य के दर्शन करें — यह परंपरा का विशेष अंग है।
  • “ॐ घृणि सूर्याय नमः” अथवा गायत्री मंत्र का जाप करें।
  • अर्घ्य का जल पैरों से न लगे, इसका ध्यान रखें — इसलिए किसी गमले या पवित्र स्थान पर अर्घ्य दें।

पूजा विधि

अर्घ्य के बाद सूर्य देव का ध्यान करें, लाल पुष्प एवं लाल चंदन अर्पित करें, गुड़ अथवा गेहूँ से बनी वस्तु का भोग लगाएँ और आदित्य हृदय स्तोत्र अथवा सूर्य चालीसा का पाठ करें। सूर्य नमस्कार इसी दिन आरंभ करना विशेष शुभ माना जाता है।

व्रत के नियम

  • दिन में एक बार भोजन, वह भी सूर्यास्त से पूर्व।
  • इस दिन नमक का त्याग किया जाता है — यह रविवार व्रत का सबसे प्रमुख नियम है।
  • तेल से बनी वस्तुएँ एवं तामसिक भोजन वर्जित।
  • इस दिन बाल एवं नाखून नहीं काटे जाते।
  • प्रायः 12, 21 अथवा 30 रविवार का संकल्प लिया जाता है।

दान एवं उपाय

लाल एवं सुनहरी वस्तुओं का दान — गेहूँ, गुड़, लाल वस्त्र, ताँबा अथवा मसूर दाल। पिता एवं बड़ों का सम्मान करना सूर्य को बल देने वाला सबसे प्रभावी उपाय माना गया है। प्रतिदिन सूर्योदय के समय अर्घ्य देना, भले ही व्रत न रखें, स्वास्थ्य एवं अनुशासन दोनों के लिए लाभकारी माना जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रविवार व्रत में नमक क्यों नहीं खाते?

नमक को रजोगुण बढ़ाने वाला माना गया है। सूर्य उपासना में सात्विकता का विशेष महत्व है, इसलिए इस दिन नमक का त्याग किया जाता है।

सूर्य को अर्घ्य किस समय देना चाहिए?

सूर्योदय के समय, अथवा उसके एक घंटे के भीतर। उसके बाद अर्घ्य का पूर्ण फल नहीं माना जाता।

अर्घ्य ताँबे के लोटे से ही क्यों?

ताँबा सूर्य की धातु मानी जाती है, इसलिए परंपरा में ताँबे के पात्र से अर्घ्य देने का विधान है। स्टील या प्लास्टिक के पात्र से बचा जाता है।

रविवार व्रत कितने रखने चाहिए?

सामान्यतः 12, 21 अथवा 30 रविवार का संकल्प लिया जाता है, फिर उद्यापन कर व्रत पूर्ण किया जाता है।

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