नवग्रह — सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, बृहस्पति (गुरु), शुक्र, शनि, राहु एवं केतु — का हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। नवग्रह के बीज मंत्रों का जाप ग्रह दोष, कुण्डली की अशुभ दशा एवं ग्रहजनित कष्टों की शांति के लिए किया जाता है। नीचे नौ ग्रहों के बीज मंत्र, अर्थ एवं जाप विधि दी गई है।
सूर्य — ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः ॥
चन्द्र — ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः ॥
मंगल — ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः ॥
बुध — ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः ॥
बृहस्पति — ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः ॥
शुक्र — ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः ॥
शनि — ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः ॥
राहु — ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः ॥
केतु — ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः ॥
ये नौ बीज मंत्र क्रमशः सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु एवं केतु — इन नवग्रहों को नमन एवं प्रसन्न करने के लिए हैं। प्रत्येक मंत्र में सम्बंधित ग्रह के बीजाक्षर सहित उस ग्रह को नमस्कार किया गया है, जिससे उस ग्रह का शुभ प्रभाव बढ़े और अशुभ प्रभाव शांत हो।
प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ आसन पर पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें। नवग्रह की शांति हेतु प्रत्येक ग्रह के बीज मंत्र का यथासंभव जाप करें, अथवा जिस ग्रह की दशा अशुभ हो उसके मंत्र का विशेष जाप करें। रुद्राक्ष माला से प्रत्येक मंत्र की कम से कम एक माला (108 बार) करना उत्तम है। सम्बंधित ग्रह के दिन (जैसे शनि हेतु शनिवार) एवं उसके अनुरूप दान करने से विशेष लाभ होता है। शुद्ध उच्चारण एवं श्रद्धा आवश्यक है।