🪔 मंत्र एवं जाप

गायत्री मंत्र: अर्थ, जाप विधि और सही समय

✍ vinodvinod.rawat@gmail.com 3 मिनट पढ़ें

संक्षेप में

गायत्री मंत्र का अर्थ है — हम उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी परमात्मा का ध्यान करते हैं; वह हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर प्रेरित करे। इसका जाप प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व, मध्याह्न और सायंकाल — तीनों संध्याओं में किया जाता है।

गायत्री मंत्र ऋग्वेद का सर्वाधिक प्रसिद्ध मंत्र है और इसे वेदमाता कहा जाता है। यह मंत्र किसी देवता की स्तुति नहीं, बल्कि बुद्धि की शुद्धि और सन्मार्ग की प्रार्थना है — इसीलिए इसे हर आयु और हर वर्ग के लिए उपयुक्त माना गया है।

मंत्र और उसका अर्थ

ॐ भूर्भुवः स्वः। तत्सवितुर्वरेण्यं। भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्॥

शब्दानुसार अर्थ — भूः अर्थात प्राणस्वरूप, भुवः अर्थात दुःखनाशक, स्वः अर्थात सुखस्वरूप। तत्सवितुर्वरेण्यं — उस श्रेष्ठ सविता (प्रकाशस्वरूप परमात्मा) का, भर्गो देवस्य धीमहि — दिव्य तेज का हम ध्यान करते हैं, धियो यो नः प्रचोदयात् — जो हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करे।

जाप का सही समय

परंपरा में तीन संध्याओं का विधान है — प्रातः सूर्योदय से कुछ पूर्व से सूर्योदय तक, मध्याह्न में, तथा सायं सूर्यास्त के समय। इनमें प्रातःकाल की संध्या सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। यदि तीनों समय संभव न हो तो केवल प्रातःकाल नियमित जाप करना पर्याप्त है।

जाप की विधि

  • स्नान के बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें।
  • रुद्राक्ष या तुलसी की माला लें — 108 मनकों की माला से एक माला जाप करें।
  • माला को तर्जनी अंगुली से स्पर्श न कराएं; अंगूठे और मध्यमा का प्रयोग करें।
  • उच्चारण शुद्ध और स्थिर गति में रखें — मन में या धीमे स्वर में जाप करें।
  • जाप पूर्ण होने पर जल अर्पित कर सूर्य को अर्घ्य दें।

नियमित जाप के लाभ

मान्यता है कि गायत्री मंत्र का नियमित जाप एकाग्रता बढ़ाता है, मन की चंचलता कम करता है और निर्णय क्षमता को स्थिर करता है। विद्यार्थियों के लिए इसे विशेष रूप से उपयोगी माना गया है, क्योंकि मंत्र का भाव ही बुद्धि की प्रेरणा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गायत्री मंत्र का जाप कितनी बार करना चाहिए?

न्यूनतम 11 बार और सामान्य साधना में 108 बार (एक माला) का विधान है। समय कम हो तो 24 बार जाप भी किया जा सकता है।

क्या स्त्रियाँ गायत्री मंत्र का जाप कर सकती हैं?

हाँ। गायत्री को वेदमाता कहा गया है और अनेक आचार्यों के अनुसार इसका जाप स्त्री-पुरुष दोनों के लिए समान रूप से विहित है।

गायत्री मंत्र रात में पढ़ सकते हैं?

परंपरागत विधान संध्या-कालों का है। रात्रि में जाप करना हो तो मानसिक जप करें — इसमें कोई दोष नहीं माना गया।

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