बुधवार बुद्धि, विद्या, व्यापार एवं वाणी के कारक बुध ग्रह तथा विघ्नहर्ता भगवान गणेश का दिन है। विद्यार्थियों एवं व्यापारियों में यह व्रत विशेष प्रचलित है।
व्रत का उद्देश्य
शिक्षा में बाधा, व्यापार में हानि, वाणी दोष, निर्णय लेने में असमंजस अथवा कुंडली में बुध के कमजोर होने पर यह व्रत रखा जाता है। परिवार में सुख-शांति एवं दांपत्य में मधुरता के लिए भी बुधवार व्रत की सलाह दी जाती है।
पूजा विधि
- प्रातः स्नान कर हरे रंग के वस्त्र धारण करें।
- गणेश जी की प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक जलाएँ।
- सिंदूर का तिलक करें और दूर्वा की इक्कीस गाँठें अर्पित करें — गणेश पूजा में दूर्वा सर्वाधिक प्रिय मानी जाती है।
- मोदक, लड्डू अथवा हरी इलायची का भोग लगाएँ।
- “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें और गणेश चालीसा का पाठ करें।
- आरती कर प्रसाद वितरित करें।
व्रत कथा (संक्षेप में)
प्रचलित कथा एक व्यापारी की है जो पत्नी को लेने ससुराल गया। बुधवार को यात्रा करना वर्जित बताए जाने पर भी वह नहीं रुका। मार्ग में विश्राम के समय उसने देखा कि उसके ही रूप-रंग का एक और व्यक्ति उसकी पत्नी के साथ बैठा है। दोनों में विवाद हुआ, कोई निर्णय न हो सका। अंततः उसने भगवान से प्रार्थना की, तब आकाशवाणी हुई कि बुधवार के दिन यात्रा के निषेध की अवहेलना का यह परिणाम है। व्यापारी ने क्षमा माँगी, बुधवार व्रत का संकल्प लिया और सब सामान्य हो गया।
कथा का व्यावहारिक भाव — नियम एवं संयम की अवहेलना भ्रम और कलह को जन्म देती है।
व्रत के नियम
- दिन में एक बार भोजन — हरी सब्जियाँ, मूँग दाल एवं हरे फल प्रमुख।
- इस दिन नमक कम मात्रा में लिया जाता है; कई परिवार बिना नमक का भोजन करते हैं।
- वाणी पर संयम रखें — किसी का अपमान अथवा झूठ इस व्रत में विशेष रूप से वर्जित है।
- सात बुधवार अथवा इक्कीस बुधवार का संकल्प प्रचलित है।
दान एवं उपाय
हरी वस्तुओं का दान शुभ माना जाता है — मूँग दाल, हरी सब्जियाँ, हरा वस्त्र अथवा काँसे का पात्र। गाय को हरा चारा खिलाना और किन्नरों को हरी वस्तु दान करना बुध से जुड़े प्रचलित उपाय हैं। विद्यार्थियों के लिए इस दिन गणेश जी को दूर्वा अर्पित कर अध्ययन आरंभ करना शुभ माना जाता है।