नवरात्रि व्रत के नियम — अखंड ज्योति, पारण और क्या न करें
संक्षेप में
नवरात्रि व्रत कई रूपों में रखा जाता है — निर्जल से लेकर केवल पहले और अंतिम दिन तक। नौ दिन अखंड ज्योति जलाने की परंपरा है, और व्रत का पारण नवमी के बाद दशमी तिथि में होता है — इस वर्ष 20 अक्टूबर 2026। स्वास्थ्य से ऊपर कोई व्रत नहीं — बीमारी, गर्भावस्था अथवा दवा चल रही हो तो उपवास से पहले चिकित्सक से अवश्य पूछें।
व्रत के प्रकार
सब एक ही तरह व्रत नहीं रखते, और परंपरा में चारों रूप मान्य हैं। अपनी सामर्थ्य के अनुसार चुनें — कठिन व्रत अधिक पुण्य देता है, ऐसा कोई विधान नहीं है।
- निर्जल व्रत — पूरे दिन जल भी नहीं। अत्यंत कठिन है और सामान्यतः केवल एक या दो दिन ही रखा जाता है।
- फलाहार व्रत — फल, दूध एवं व्रत के अन्न — यही सर्वाधिक प्रचलित रूप है। नौ दिन इसी तरह रखा जाता है।
- एक समय भोजन — दिन में एक बार सात्विक भोजन, शेष समय फलाहार। जिनसे पूरा उपवास न हो, उनके लिए।
- पहला एवं अंतिम — केवल प्रतिपदा और अष्टमी अथवा नवमी का व्रत। नौ दिन न रख पाने वालों में आम।
नौ दिन के नियम
- पहले दिन संकल्प लें — कितने दिन और किस रूप में व्रत रखना है, यह स्पष्ट कर लें।
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें; प्रतिदिन देवी की पूजा एवं आरती करें।
- सेंधा नमक का प्रयोग करें, साधारण नमक का नहीं।
- दिन में पर्याप्त जल एवं फल लेते रहें — निर्जल व्रत न हो तो भूखे-प्यासे न रहें।
- ब्रह्मचर्य, सत्य वचन एवं संयमित व्यवहार — व्रत का यही मुख्य भाग माना गया है।
- अष्टमी अथवा नवमी को कन्या पूजन करें।
क्या न करें
ये नौ दिन वर्जित माने जाते हैं। ध्यान रहे — यह लोक परंपरा है, कोई दंड-विधान नहीं।
- बाल एवं नाखून काटना, दाढ़ी बनाना।
- मांस, मदिरा, प्याज एवं लहसुन।
- चमड़े की वस्तुएँ — बेल्ट, जूते, पर्स।
- दिन में सोना।
- घर को पूरी तरह खाली छोड़ना, जब अखंड ज्योति जल रही हो।
- किसी का अपमान, कलह अथवा कटु वचन — परंपरा में इसे सबसे बड़ा दोष कहा गया है।
अखंड ज्योति के नियम
अखंड अर्थात जो खंडित न हो — नौ दिन निरंतर जलने वाली ज्योति। यह व्रत का सबसे अधिक ध्यान माँगने वाला भाग है।
- घटस्थापना के समय, शुभ मुहूर्त में ही प्रज्वलित करें।
- घी की ज्योति देवी के दाहिनी ओर, तेल की बाईं ओर रखी जाती है।
- बाती रुई की लंबी बत्ती अथवा कलावा से बनाई जाती है, ताकि देर तक चले।
- दीपक के नीचे अक्षत (साबुत चावल) की ढेरी रखें।
- घी अथवा तेल समय-समय पर देखते रहें — यही सबसे आम चूक है।
- काँच की चिमनी अथवा आड़ लगाएँ ताकि हवा से न बुझे।
- ज्योति को फूँक मारकर कभी न बुझाएँ; पारण के दिन स्वयं शांत होने दें।
बुझ जाए तो घबराएँ नहीं। क्षमा प्रार्थना कर पुनः जला दें — इसका कोई प्रायश्चित विधान शास्त्रों में नहीं है।
व्रत पारण — कब और कैसे
नौ दिन का व्रत नवमी पूर्ण होने के बाद, दशमी तिथि में खोला जाता है — इस वर्ष 20 अक्टूबर 2026, विजयादशमी को। अष्टमी अथवा नवमी तक व्रत रखने वाले कन्या पूजन के बाद उसी दिन पारण कर लेते हैं।
- पहले देवी की आरती कर क्षमा प्रार्थना करें।
- कन्याओं अथवा ब्राह्मण को भोजन कराकर दक्षिणा दें, तब स्वयं खाएँ।
- पारण हल्के सात्विक भोजन से करें — नौ दिन बाद एकदम भारी भोजन शरीर पर भारी पड़ता है।
- जौ के पात्र में उगे ज्वारे देवी को अर्पित कर जल में प्रवाहित करें अथवा पौधों में रख दें।
- कलश का जल घर में छिड़कें और उसमें रखे सिक्के को संभालकर रख लें — यह परंपरा है।
किन्हें व्रत से बचना चाहिए
गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली स्त्रियाँ, मधुमेह अथवा रक्तचाप के रोगी, छोटे बच्चे, वृद्ध और कोई भी बीमार व्यक्ति — उपवास से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य पूछें। नियमित दवा किसी भी स्थिति में न छोड़ें।
परंपरा में भी इनके लिए छूट मानी गई है। संकल्प लेकर केवल पूजा, आरती एवं दुर्गा चालीसा का पाठ कर लेना पर्याप्त माना जाता है — व्रत न रखने से कोई दोष नहीं लगता।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नवरात्रि व्रत में क्या खा सकते हैं?
फल, दूध, दही, मखाना, सिंघाड़े एवं कुट्टू का आटा, साबूदाना, आलू, सेंधा नमक और मेवे। साधारण नमक, अनाज, दालें, प्याज एवं लहसुन वर्जित माने जाते हैं। पूरी सूची व्रत के फलाहार वाले पृष्ठ पर दी गई है।
अखंड ज्योति के क्या नियम हैं?
ज्योति नौ दिन निरंतर जलती रहनी चाहिए — बुझनी नहीं चाहिए। घी की ज्योति देवी के दाहिनी ओर और तेल की बाईं ओर रखी जाती है। घर को अकेला न छोड़ें, बाती एवं घी समय से देखते रहें, और ज्योति को सीधे फूँक मारकर कभी न बुझाएँ।
अखंड ज्योति बुझ जाए तो क्या करें?
परंपरा में इसे अशुभ माना जाता है, पर इसका कोई प्रायश्चित विधान नहीं है। क्षमा प्रार्थना कर ज्योति पुनः प्रज्वलित कर दें और शेष दिन सावधानी रखें। भय अथवा ग्लानि में पड़ने की आवश्यकता नहीं — भाव शुद्ध हो तो पूजा खंडित नहीं होती।
नवरात्रि व्रत का पारण कब करें?
नौ दिन का व्रत नवमी के बाद, दशमी तिथि में पारण किया जाता है। 2026 में यह 20 अक्टूबर, विजयादशमी को है। अष्टमी अथवा नवमी तक का व्रत रखने वाले कन्या पूजन के बाद उसी दिन पारण करते हैं।
व्रत में कौन से काम वर्जित माने जाते हैं?
बाल एवं नाखून काटना, दाढ़ी बनाना, मांस-मदिरा, प्याज-लहसुन, चमड़े की वस्तुएँ पहनना, दिन में सोना और किसी का अपमान करना — ये नौ दिन वर्जित माने जाते हैं। ये लोक परंपरा है, दंड-विधान नहीं।
क्या व्रत के बीच में दवा ली जा सकती है?
हाँ। नियमित दवा कभी न छोड़ें। परंपरा में औषधि का निषेध नहीं है, और स्वास्थ्य से ऊपर कोई व्रत नहीं। दवा खाली पेट नहीं लेनी हो तो फलाहार के साथ लें।
किन्हें नवरात्रि व्रत नहीं रखना चाहिए?
गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली स्त्रियाँ, मधुमेह अथवा रक्तचाप के रोगी, छोटे बच्चे, वृद्ध और कोई भी बीमार व्यक्ति — इन्हें उपवास से पहले अपने चिकित्सक से पूछना चाहिए। परंपरा में भी इनके लिए छूट मानी गई है; संकल्प लेकर केवल पूजा एवं पाठ कर लेना पर्याप्त माना जाता है।
मासिक धर्म में व्रत एवं पूजा की क्या मान्यता है?
इस पर परंपराएँ एक मत नहीं हैं। कई परिवारों में इन दिनों पूजा स्थल से दूर रहने की रीति है, तो कई में मानसिक जप एवं पाठ की छूट मानी जाती है। कोई एक शास्त्रीय विधान सबके लिए नहीं है — अपने घर अथवा कुल की परंपरा का पालन करें।