नवरात्रि 2026 के नौ रंग — किस दिन कौन सा रंग पहनें
संक्षेप में
नवरात्रि के रंगों की दो अलग परंपराएँ चलती हैं — एक देवी के स्वरूप से जुड़ी, जो हर वर्ष एक सी रहती है, और दूसरी वार से जुड़ी, जो हर वर्ष बदल जाती है। इसी कारण हर जगह अलग सूची मिलती है। दोनों नीचे दी हैं। दोनों लोक परंपरा हैं, शास्त्रीय विधान नहीं।
देवी स्वरूप के अनुसार रंग
प्रत्येक दिन जिस स्वरूप की पूजा होती है, उससे जुड़ा रंग यह है। यह सूची वर्ष बदलने पर नहीं बदलती।
| दिन | तिथि | देवी | रंग |
|---|---|---|---|
| दिन 1 | 11 अक्टूबर 2026, रविवार | माँ शैलपुत्री | पीला |
| दिन 2 | 12 अक्टूबर 2026, सोमवार | माँ ब्रह्मचारिणी | हरा |
| दिन 3 | 13 अक्टूबर 2026, मंगलवार | माँ चंद्रघंटा | धूसर (सलेटी) |
| दिन 4 | 14 अक्टूबर 2026, बुधवार | माँ कूष्मांडा | नारंगी |
| दिन 5 | 15 अक्टूबर 2026, गुरुवार | माँ स्कंदमाता | श्वेत |
| दिन 6 | 16 अक्टूबर 2026, शुक्रवार | माँ कात्यायनी | लाल |
| दिन 7 | 17 अक्टूबर 2026, शनिवार | माँ कालरात्रि | नीला |
| दिन 8 | 19 अक्टूबर 2026, सोमवार | माँ महागौरी | गुलाबी |
| दिन 9 | 19 अक्टूबर 2026, सोमवार | माँ सिद्धिदात्री | बैंगनी |
वार के अनुसार रंग — 2026
समाचार-पत्रों एवं पंचांगों में जो सूची छपती है वह वार से बनती है। चूँकि नवरात्रि हर वर्ष अलग वार से आरंभ होती है, यही कारण है कि हर वर्ष सूची बदली हुई दिखती है — परंपरा नहीं बदली, तिथियाँ बदलीं।
| तारीख़ | वार | तिथि | रंग |
|---|---|---|---|
| 11 अक्टूबर 2026 | रविवार | प्रतिपदा | नारंगी |
| 12 अक्टूबर 2026 | सोमवार | द्वितीया | श्वेत |
| 13 अक्टूबर 2026 | मंगलवार | तृतीया | लाल |
| 14 अक्टूबर 2026 | बुधवार | चतुर्थी | गहरा नीला |
| 15 अक्टूबर 2026 | गुरुवार | पंचमी | पीला |
| 16 अक्टूबर 2026 | शुक्रवार | षष्ठी | हरा |
| 17 अक्टूबर 2026 | शनिवार | सप्तमी | धूसर (सलेटी) |
| 18 अक्टूबर 2026 | रविवार | सप्तमी (तिथि वृद्धि) | नारंगी |
| 19 अक्टूबर 2026 | सोमवार | अष्टमी एवं नवमी | श्वेत |
| 20 अक्टूबर 2026 | मंगलवार | दशमी | लाल |
ध्यान दें — इस वर्ष सप्तमी दो दिन पड़ रही है, इसलिए नवरात्रि 10 दिन की है। देवी स्वरूप नौ ही रहते हैं, पर वार दस हैं — इसीलिए ऊपर की दोनों सूचियों की लंबाई अलग है। पूरा तिथि कैलेंडर देखें।
कौन सा वार कौन से रंग से जुड़ा है
वार वाली सूची ग्रहों से जुड़ी है — हर वार का एक स्वामी ग्रह है और उससे जुड़ा एक रंग।
- रविवार — नारंगी। सूर्य का वार — तेज एवं उत्साह का रंग।
- सोमवार — श्वेत। चंद्र का वार — शांति एवं पवित्रता।
- मंगलवार — लाल। मंगल का वार — शक्ति एवं पराक्रम।
- बुधवार — गहरा नीला। बुध का वार — स्थिरता एवं बुद्धि।
- गुरुवार — पीला। गुरु का वार — ज्ञान एवं शुभता।
- शुक्रवार — हरा। शुक्र का वार — समृद्धि एवं नवजीवन।
- शनिवार — धूसर (सलेटी)। शनि का वार — संयम एवं धैर्य।
रंग का पालन कैसे करें
- कोई एक परंपरा चुन लें और नौ दिन उसी पर टिके रहें — दोनों को मिलाने से उलझन ही बढ़ती है।
- घर अथवा कुल की परंपरा हो तो वही सर्वोपरि है।
- वस्त्र न मिले तो चुनरी, रुमाल अथवा उस रंग का पुष्प अर्पित कर दें।
- रंग न रख पाने से व्रत अथवा पूजा में कोई दोष नहीं लगता।
क्या इसका शास्त्रीय आधार है
सीधा उत्तर — नहीं। दुर्गा सप्तशती एवं पुराणों में देवी के स्वरूप, मंत्र, ध्यान श्लोक एवं पूजा विधि विस्तार से मिलते हैं, पर नौ दिन नौ रंग पहनने का कोई विधान नहीं है। यह परंपरा अपेक्षाकृत नई है और महाराष्ट्र से होते हुए समाचार-पत्रों के माध्यम से फैली। इसका पालन करना शुभ भाव से जुड़ा है, अनिवार्यता से नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नवरात्रि 2026 में कौन से दिन कौन सा रंग पहनें?
दो परंपराएँ चलती हैं और दोनों अलग उत्तर देती हैं। देवी स्वरूप के अनुसार पहले दिन पीला, दूसरे हरा, तीसरे धूसर, चौथे नारंगी, पाँचवें श्वेत, छठे लाल, सातवें नीला, आठवें गुलाबी और नवें बैंगनी। वार के अनुसार रंग हर वर्ष बदल जाता है, क्योंकि तिथियाँ अलग वार पर पड़ती हैं। दोनों सूचियाँ इस पृष्ठ पर नीचे दी गई हैं।
हर साल नवरात्रि के रंग अलग क्यों बताए जाते हैं?
क्योंकि जो सूची समाचार-पत्रों में छपती है वह वार से जुड़ी है — सोमवार को श्वेत, मंगलवार को लाल, इत्यादि। नवरात्रि हर वर्ष अलग वार से आरंभ होती है, इसलिए वही सूची हर वर्ष बदल जाती है। देवी स्वरूप से जुड़ा रंग नहीं बदलता।
क्या नौ रंग शास्त्रों में लिखे हैं?
नहीं। यह लोक परंपरा है, शास्त्रीय विधान नहीं। पुराणों में देवी के स्वरूप, मंत्र एवं पूजा विधि का वर्णन है, रंग पहनने का विधान नहीं। इसीलिए अलग-अलग क्षेत्रों एवं प्रकाशनों में सूची भिन्न मिलती है।
यदि उस रंग के वस्त्र न हों तो क्या करें?
पूजा में कोई कमी नहीं आती। रंग परंपरा है, अनिवार्यता नहीं। स्वच्छ वस्त्र और श्रद्धा — यही मुख्य है। चाहें तो उस रंग का रुमाल, चुनरी अथवा पुष्प अर्पित कर भाव पूरा कर सकते हैं।
2026 में नवरात्रि दस दिन की क्यों है?
इस वर्ष सप्तमी तिथि की वृद्धि है — सप्तमी 17 और 18 अक्टूबर, दो दिन पड़ रही है। इसलिए 11 से 20 अक्टूबर, दस दिन हैं, जबकि देवी स्वरूप नौ ही रहते हैं। दोनों सप्तमी को माँ कालरात्रि की पूजा होती है।
कौन सा रंग किस देवी से जुड़ा है?
माँ शैलपुत्री — पीला, ब्रह्मचारिणी — हरा, चंद्रघंटा — धूसर, कूष्मांडा — नारंगी, स्कंदमाता — श्वेत, कात्यायनी — लाल, कालरात्रि — नीला, महागौरी — गुलाबी और सिद्धिदात्री — बैंगनी।