🪔 नवरात्रि दिन 6

नवरात्रि छठा दिन — माँ कात्यायनी की कथा, मंत्र और पूजा विधि

📅 16 अक्टूबर 2026, शुक्रवारषष्ठी तिथि

संक्षेप में

नवरात्रि के 6 दिन माँ कात्यायनी की पूजा होती है — 16 अक्टूबर 2026, शुक्रवार। मंत्र ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥, भोग शहद और दिन का रंग लाल।

नाम का अर्थ

ऋषि कात्यायन ने देवी को पुत्री रूप में पाने की तपस्या की थी; उन्हीं के घर अवतरित होने से नाम कात्यायनी पड़ा। महिषासुर वध इसी स्वरूप में हुआ माना जाता है।

कथा

महर्षि कात्यायन ने देवी को पुत्री रूप में पाने के लिए कठोर तप किया। देवी ने उनके घर जन्म लिया, इसीलिए नाम कात्यायनी पड़ा। महिषासुर के अत्याचार से त्रस्त देवताओं के तेज से प्रकट होकर इन्होंने उसका वध किया — इसी से इन्हें महिषासुरमर्दिनी भी कहा जाता है। ब्रजमंडल में गोपियों ने श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने के लिए इन्हीं की आराधना की थी।

स्वरूप

सिंह पर सवार, चार भुजाओं में चंद्रहास खड्ग एवं कमल, तथा अभय और वर मुद्रा। स्वर्ण के समान तेजस्वी वर्ण।

मंत्र एवं ध्यान श्लोक

ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥

ध्यान श्लोक:

चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी॥

मंत्र का जाप 108 बार करने की परंपरा है। पूजा आरंभ करने से पूर्व ध्यान श्लोक का पाठ किया जाता है।

भोग एवं रंग

  • भोग — शहद — मान्यता है कि इससे सौंदर्य एवं आकर्षण की प्राप्ति होती है।
  • दिन का रंग — लाल

रंगों की परंपरा शास्त्रीय विधान नहीं, लोक परंपरा है — वस्त्र न मिल पाए तो पूजा में कोई कमी नहीं आती।

पूजा विधि

  • प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • कलश एवं देवी के समक्ष दीप जलाएँ; अखंड ज्योति जल रही हो तो उसकी बाती ठीक कर लें।
  • माँ कात्यायनी का ध्यान कर ध्यान श्लोक का पाठ करें।
  • पुष्प, अक्षत, रोली एवं धूप अर्पित करें।
  • मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • भोग अर्पित कर आरती करें और प्रसाद बाँटें।
  • जौ के पात्र में थोड़ा जल छिड़कना न भूलें।

इस दिन की विशेष बात

बंगाल में इसी दिन से दुर्गा पूजा का विधिवत आरंभ होता है। परंपरा में विवाह में आ रही बाधा के निवारण हेतु इसी स्वरूप की उपासना बताई जाती है — ब्रज की गोपियों द्वारा कात्यायनी व्रत की कथा इसी से जुड़ी है।

ग्रह संबंध

परंपरा में नवरात्रि के नौ स्वरूपों को नौ ग्रहों से जोड़ा जाता है। माँ कात्यायनी का संबंध बृहस्पति से माना जाता है। यह लोक परंपरा है, शास्त्रीय विधान नहीं — पूजा का फल इससे बँधा हुआ नहीं माना जाता।

महत्व

विवाह में आ रही बाधा दूर करने के लिए इनकी उपासना विशेष रूप से प्रचलित है। परंपरा में इस दिन का स्थान आज्ञा चक्र माना गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नवरात्रि के छठे दिन कौन सी देवी की पूजा होती है?

माँ कात्यायनी की — महिषासुर का वध करने वाली देवी।

कात्यायनी नाम कैसे पड़ा?

महर्षि कात्यायन के तप से प्रसन्न होकर देवी ने उनके घर पुत्री रूप में जन्म लिया, इसीलिए वे कात्यायनी कहलाईं।

विवाह के लिए कात्यायनी पूजा क्यों की जाती है?

परंपरा में ब्रज की गोपियों ने श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने के लिए इन्हीं की आराधना की थी। इसी से विवाह बाधा दूर करने हेतु इनकी उपासना प्रचलित हुई।

छठे दिन क्या भोग लगाएँ?

शहद। परंपरा में इसे सौंदर्य एवं आकर्षण देने वाला बताया गया है।