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श्री दुर्गा चालीसा

पारंपरिक चालीसा

🔊 ऑडियो उपलब्ध⏱ 8 मिनट📖 हिंदी🔱 नवरात्रि विशेष

श्री दुर्गा चालीसा माँ जगदम्बा की महिमा का गान करने वाला चालीस चौपाइयों का पावन पाठ है। नवरात्रि तथा प्रत्येक मंगलवार-शुक्रवार को इसका पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है। नीचे दुर्गा चालीसा का शुद्ध एवं सम्पूर्ण पाठ दिया गया है। श्रद्धापूर्वक नित्य पाठ करने से भय, संकट एवं शत्रु-बाधा का नाश होकर माँ दुर्गा की कृपा, शक्ति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

॥ चौपाई ॥

1नमो नमो दुर्गे सुख करनी । नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी ॥

2निरंकार है ज्योति तुम्हारी । तिहूँ लोक फैली उजियारी ॥

3शशि ललाट मुख महाविशाला । नेत्र लाल भृकुटि विकराला ॥

4रूप मातु को अधिक सुहावे । दरश करत जन अति सुख पावे ॥

5तुम संसार शक्ति लै कीना । पालन हेतु अन्न धन दीना ॥

6अन्नपूर्णा हुई जग पाला । तुम ही आदि सुन्दरी बाला ॥

7प्रलयकाल सब नाशन हारी । तुम गौरी शिवशंकर प्यारी ॥

8शिव योगी तुम्हरे गुण गावें । ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें ॥

9रूप सरस्वती को तुम धारा । दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा ॥

10धरयो रूप नरसिंह को अम्बा । परगट भई फाड़कर खम्बा ॥

11रक्षा करि प्रह्लाद बचायो । हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो ॥

12लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं । श्री नारायण अंग समाहीं ॥

13क्षीरसिन्धु में करत विलासा । दयासिन्धु दीजै मन आसा ॥

14हिंगलाज में तुम्हीं भवानी । महिमा अमित न जात बखानी ॥

15मातंगी अरु धूमावति माता । भुवनेश्वरी बगला सुख दाता ॥

16श्री भैरव तारा जग तारिणी । छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी ॥

17केहरि वाहन सोह भवानी । लांगुर वीर चलत अगवानी ॥

18कर में खप्पर खड्ग विराजै । जाको देख काल डर भाजै ॥

19सोहै अस्त्र और त्रिशूला । जाते उठत शत्रु हिय शूला ॥

20नगरकोट में तुम्हीं विराजत । तिहुँलोक में डंका बाजत ॥

21शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे । रक्तबीज शंखन संहारे ॥

22महिषासुर नृप अति अभिमानी । जेहि अघ भार मही अकुलानी ॥

23रूप कराल कालिका धारा । सेन सहित तुम तिहि संहारा ॥

24परी गाढ़ सन्तन पर जब जब । भई सहाय मातु तुम तब तब ॥

25अमरपुरी अरु बासव लोका । तब महिमा सब रहें अशोका ॥

26ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी । तुम्हें सदा पूजें नरनारी ॥

27प्रेम भक्ति से जो यश गावें । दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें ॥

28ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई । जन्ममरण ताकौ छुटि जाई ॥

29जोगी सुर मुनि कहत पुकारी । योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी ॥

30शंकर आचारज तप कीनो । काम अरु क्रोध जीति सब लीनो ॥

31निशिदिन ध्यान धरो शंकर को । काहु काल नहिं सुमिरो तुमको ॥

32शक्ति रूप का मरम न पायो । शक्ति गई तब मन पछितायो ॥

33शरणागत हुई कीर्ति बखानी । जय जय जय जगदम्ब भवानी ॥

34भई प्रसन्न आदि जगदम्बा । दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा ॥

35मोको मातु कष्ट अति घेरो । तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो ॥

36आशा तृष्णा निपट सतावें । मोह मदादिक सब बिनशावें ॥

37शत्रु नाश कीजै महारानी । सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी ॥

38करो कृपा हे मातु दयाला । ऋद्धिसिद्धि दै करहु निहाला ॥

39जब लगि जिऊँ दया फल पाऊँ । तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊँ ॥

40श्री दुर्गा चालीसा जो कोई गावै । सब सुख भोग परमपद पावै ॥

✦ दुर्गा चालीसा के लाभ ✦

🔱शक्ति एवं रक्षा

माँ दुर्गा का चालीसा पाठ भक्त को शक्ति और सुरक्षा प्रदान करता है।

🛡️भय-शत्रु नाश

भय, शत्रु-बाधा और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है।

🪷सुख-समृद्धि

घर में सुख, समृद्धि और सौभाग्य का वास होता है।

🙏मनोकामना पूर्ति

नित्य पाठ से भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।