नवरात्रि आठवाँ दिन — माँ महागौरी की कथा, मंत्र और पूजा विधि
संक्षेप में
नवरात्रि के 8 दिन माँ महागौरी की पूजा होती है — 19 अक्टूबर 2026, सोमवार। मंत्र ॐ देवी महागौर्यै नमः॥, भोग नारियल और दिन का रंग गुलाबी।
नाम का अर्थ
महा अर्थात अत्यंत और गौरी अर्थात गौर वर्ण। कथा के अनुसार कठोर तप से देवी का वर्ण श्याम हो गया था, जिसे शिव ने गंगाजल से धोकर पुनः उज्ज्वल किया — तभी से महागौरी कहलाईं।
कथा
शिव को पति रूप में पाने के लिए किए गए कठोर तप से इनका शरीर काला पड़ गया था। तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने गंगाजल से इनका अभिषेक किया, जिससे इनका शरीर पुनः अत्यंत कांतिमान एवं गौर हो गया — इसी से ये महागौरी कहलाईं। यह स्वरूप पवित्रता एवं शांति का प्रतीक माना जाता है।
स्वरूप
पूर्णतः श्वेत वर्ण, श्वेत वस्त्र, वृषभ पर सवार। चार भुजाओं में त्रिशूल एवं डमरू, तथा अभय और वर मुद्रा। शंख, चंद्र एवं कुंद पुष्प के समान गौर वर्ण होने से नाम महागौरी।
मंत्र एवं ध्यान श्लोक
ॐ देवी महागौर्यै नमः॥
ध्यान श्लोक:
श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥
मंत्र का जाप 108 बार करने की परंपरा है। पूजा आरंभ करने से पूर्व ध्यान श्लोक का पाठ किया जाता है।
भोग एवं रंग
- भोग — नारियल — मान्यता है कि इससे मनोकामना पूर्ण होती है।
- दिन का रंग — गुलाबी
रंगों की परंपरा शास्त्रीय विधान नहीं, लोक परंपरा है — वस्त्र न मिल पाए तो पूजा में कोई कमी नहीं आती।
पूजा विधि
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- कलश एवं देवी के समक्ष दीप जलाएँ; अखंड ज्योति जल रही हो तो उसकी बाती ठीक कर लें।
- माँ महागौरी का ध्यान कर ध्यान श्लोक का पाठ करें।
- पुष्प, अक्षत, रोली एवं धूप अर्पित करें।
- मंत्र का 108 बार जाप करें।
- भोग अर्पित कर आरती करें और प्रसाद बाँटें।
- जौ के पात्र में थोड़ा जल छिड़कना न भूलें।
इस दिन की विशेष बात
महाअष्टमी का दिन — नवरात्रि का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। संधि पूजा इसी दिन होती है, और अधिकांश घरों में कन्या पूजन भी आज ही किया जाता है।
ग्रह संबंध
परंपरा में नवरात्रि के नौ स्वरूपों को नौ ग्रहों से जोड़ा जाता है। माँ महागौरी का संबंध राहु से माना जाता है। यह लोक परंपरा है, शास्त्रीय विधान नहीं — पूजा का फल इससे बँधा हुआ नहीं माना जाता।
महत्व
पापों के शमन एवं मन की शुद्धि के लिए उपासना की जाती है। इसी दिन अनेक परिवारों में कन्या पूजन किया जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नवरात्रि की अष्टमी को कौन सी देवी की पूजा होती है?
माँ महागौरी की — श्वेत वर्ण एवं पवित्रता की प्रतीक देवी।
महागौरी नाम कैसे पड़ा?
कठोर तप से उनका शरीर श्याम हो गया था। शिव ने गंगाजल से अभिषेक किया और वे पुनः अत्यंत गौर वर्ण हो गईं — इसी से महागौरी नाम पड़ा।
अष्टमी को क्या भोग लगाएँ?
नारियल। कन्या पूजन में हलवा, काले चने एवं पूरी का भोग बनाया जाता है।
कन्या पूजन अष्टमी को करें या नवमी को?
दोनों तिथियाँ मान्य हैं और यह कुल परंपरा पर निर्भर है। 2026 में अष्टमी और नवमी एक ही दिन — 19 अक्टूबर को — पड़ रही हैं।