नवरात्रि, एकादशी, सोमवार, महाशिवरात्रि — हर व्रत में सबसे पहला प्रश्न यही होता है कि खाया क्या जाए। नीचे पूरी सूची दी गई है, साथ ही नौ दिन के व्रत में स्वास्थ्य बनाए रखने के सुझाव भी।
क्या खा सकते हैं
- आटे — कुट्टू (बकव्हीट), सिंघाड़ा, राजगिरा (रामदाना), अरारोट
- अनाज के विकल्प — साबूदाना, समा के चावल (मोरधन), मखाना
- सब्जियाँ — आलू, शकरकंद, अरबी, कच्चा केला, लौकी, कद्दू, खीरा, टमाटर, पालक, गाजर
- फल — सभी मौसमी फल, विशेषकर केला, सेब, पपीता एवं अनार
- दूध उत्पाद — दूध, दही, पनीर, मक्खन, घी, छाछ, खोया
- मेवा — बादाम, काजू, किशमिश, अखरोट, मूँगफली, छुहारा
- मसाले — सेंधा नमक, जीरा, काली मिर्च, हरी मिर्च, अदरक, नींबू, हरा धनिया, इलायची
क्या नहीं खाया जाता
- गेहूँ, चावल, मक्का, बाजरा एवं सभी सामान्य अनाज
- सभी दालें एवं बेसन
- सामान्य (समुद्री) नमक
- प्याज एवं लहसुन
- हल्दी, हींग, गरम मसाला, धनिया पाउडर (अनेक परंपराओं में)
- मांस, अंडा एवं मदिरा
- सरसों एवं तिल का तेल — घी या मूँगफली का तेल प्रयोग करें
नौ दिन के व्रत में संतुलन कैसे रखें
नवरात्रि का व्रत लंबा होता है, इसलिए केवल तला हुआ फलाहार लेने से कमजोरी एवं अम्लता हो जाती है। कुछ व्यावहारिक सुझाव:
- दिन की शुरुआत फल अथवा दूध से करें, सीधे तली वस्तु से नहीं।
- हर दिन कम से कम एक बार दही या छाछ अवश्य लें — यह पाचन बनाए रखता है।
- पानी भरपूर पिएँ; नारियल पानी एवं नींबू पानी उपयोगी रहते हैं।
- मखाना एवं मेवा साथ रखें — भूख लगने पर तली वस्तु की जगह ये लें।
- दिन में एक बार समा के चावल अथवा कुट्टू की रोटी लें ताकि ऊर्जा बनी रहे।
- चाय-कॉफी कम रखें — खाली पेट अम्लता बढ़ाती है।
दिनभर का सरल नमूना
- प्रातः — दूध अथवा फल, कुछ भीगे बादाम
- दोपहर — समा के चावल की खिचड़ी या कुट्टू की रोटी + आलू की सब्जी + दही
- संध्या — मखाना भूनकर, या फल एवं नारियल पानी
- रात्रि — साबूदाना खिचड़ी या सिंघाड़े के आटे का हलवा, थोड़ी मात्रा में
किन्हें सावधानी रखनी चाहिए
मधुमेह के रोगी, गर्भवती स्त्रियाँ, वृद्धजन एवं लंबी दवा लेने वाले निर्जला व्रत से बचें — शास्त्रों में भी विवेक को प्राथमिकता दी गई है। ऐसी स्थिति में फलाहार सहित व्रत रखना पूर्णतः मान्य है। साबूदाना एवं आलू में स्टार्च अधिक होता है, इसलिए मधुमेह में इनकी मात्रा सीमित रखें और मखाना, फल एवं दही को प्राथमिकता दें।