🪔 भोग एवं प्रसाद

पंचामृत बनाने की विधि, सामग्री और महत्व

✍ vinodvinod.rawat@gmail.com 3 मिनट पढ़ें

संक्षेप में

पंचामृत पाँच पवित्र वस्तुओं — दूध, दही, घी, शहद और शक्कर — से बनता है और हर अभिषेक तथा पूजा में अर्पित किया जाता है। इसे बनाने के लिए कच्चे दूध में दही, शहद, घी और शक्कर मिलाकर तुलसी दल डाला जाता है। अनुपात सामान्यतः दूध सबसे अधिक और घी सबसे कम रखा जाता है।

पंचामृत अर्थात “पाँच अमृत”। यह हर पूजा, अभिषेक एवं संस्कार का अभिन्न अंग है — सत्यनारायण कथा से लेकर शिव अभिषेक और जन्माष्टमी तक। इसे बनाना अत्यंत सरल है, किंतु सामग्री की शुद्धता और क्रम का ध्यान रखना आवश्यक माना जाता है।

सामग्री

  • कच्चा दूध — 1 कटोरी (गाय का दूध सर्वोत्तम)
  • दही — 2 बड़े चम्मच (ताज़ा, खट्टा नहीं)
  • शहद — 1 बड़ा चम्मच
  • देसी घी — 1 छोटा चम्मच
  • शक्कर या मिश्री — 1 बड़ा चम्मच
  • तुलसी दल — 5 से 11 पत्ते
  • वैकल्पिक — केसर के कुछ लच्छे, कटे हुए मेवे, सूखा नारियल

बनाने की विधि

  • ताँबे, चाँदी अथवा काँच का स्वच्छ पात्र लें — स्टील का प्रयोग परंपरा में कम किया जाता है।
  • सबसे पहले दही को अच्छी तरह फेंट लें ताकि गाँठें न रहें।
  • उसमें कच्चा दूध मिलाएँ और धीरे-धीरे चलाएँ।
  • अब शहद, घी एवं शक्कर मिलाएँ। मिश्री हो तो पीसकर डालें।
  • अंत में तुलसी दल डालें — तुलसी सदैव सबसे बाद में डाली जाती है।
  • चाहें तो केसर एवं मेवे मिलाएँ। पंचामृत तैयार है।

अनुपात का नियम

परंपरागत अनुपात में दूध सबसे अधिक और घी सबसे कम रखा जाता है। एक सरल नियम यह है — दूध 5 भाग, दही 2 भाग, शक्कर 2 भाग, शहद 1 भाग और घी 1 भाग। स्वाद के लिए नहीं, संतुलन के लिए यह क्रम रखा जाता है, क्योंकि घी एवं शहद अधिक मात्रा में डालने से मिश्रण भारी हो जाता है।

पाँच तत्वों का प्रतीक

परंपरा में पंचामृत के पाँचों द्रव्यों को जीवन के गुणों का प्रतीक माना गया है:

  • दूध — पवित्रता एवं सात्विकता
  • दही — समृद्धि एवं पुष्टि
  • घी — स्नेह एवं शक्ति
  • शहद — मधुर वाणी एवं एकाग्रता
  • शक्कर — मिठास एवं सुख

ध्यान रखने योग्य बातें

  • दूध कच्चा होना चाहिए — उबला दूध अभिषेक में प्रयोग नहीं किया जाता।
  • तुलसी पत्र एक दिन पूर्व तोड़कर रखें, क्योंकि एकादशी एवं रविवार को तुलसी तोड़ना वर्जित है।
  • शिव अभिषेक के पंचामृत में तुलसी नहीं डाली जाती।
  • पंचामृत बनाते समय स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • अर्पित करने के बाद इसे प्रसाद रूप में ग्रहण करें — फेंका नहीं जाता।

चरणामृत से अंतर

दोनों को अक्सर एक समझ लिया जाता है, किंतु अंतर है। चरणामृत वह जल है जिससे भगवान के चरणों का अभिषेक किया गया हो — उसमें तुलसी एवं थोड़ी शक्कर डाली जाती है और वह तरल होता है। पंचामृत पाँच द्रव्यों का मिश्रण है, जो अभिषेक से पहले अर्पित किया जाता है। परंपरा में चरणामृत दाहिने हाथ से तीन बार लिया जाता है और उसके बाद हाथ सिर पर नहीं फेरा जाता।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचामृत में कौन-कौन सी पाँच चीज़ें होती हैं?

दूध, दही, घी, शहद और शक्कर। इनमें तुलसी दल मिलाकर इसे पूर्ण किया जाता है।

क्या पंचामृत में उबला दूध डाल सकते हैं?

नहीं। परंपरा में कच्चा दूध ही प्रयोग किया जाता है, विशेषकर अभिषेक के लिए।

शिव जी के पंचामृत में तुलसी क्यों नहीं डालते?

शिव पूजा में तुलसी वर्जित मानी जाती है, इसलिए शिव अभिषेक के पंचामृत में तुलसी के स्थान पर बेलपत्र अर्पित किया जाता है।

पंचामृत कितनी देर तक रखा जा सकता है?

इसे ताज़ा बनाकर उसी दिन ग्रहण करना चाहिए। दूध-दही आधारित होने के कारण अधिक समय रखने पर यह खराब हो जाता है।

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