मोदक का अर्थ ही है — आनंद देने वाला। यही कारण है कि गणेश जी को मोदकप्रिय कहा जाता है। दो प्रकार सबसे प्रचलित हैं: भाप में पके उकडीचे मोदक (महाराष्ट्र की पारंपरिक विधि) और तले हुए मोदक।
भरावन की सामग्री
- ताज़ा कसा नारियल — 1 कटोरी
- गुड़ — 3/4 कटोरी (कद्दूकस किया हुआ)
- इलायची पाउडर — 1/2 छोटा चम्मच
- खसखस — 1 छोटा चम्मच (वैकल्पिक)
- घी — 1 छोटा चम्मच
आटे की सामग्री (उकडीचे मोदक)
- चावल का बारीक आटा — 1 कटोरी
- पानी — 1 कटोरी
- घी — 1 छोटा चम्मच
- नमक — चुटकी भर
भरावन बनाना
- कड़ाही में घी गरम कर उसमें कसा नारियल डालकर एक मिनट भूनें।
- गुड़ मिलाएँ और धीमी आँच पर तब तक चलाएँ जब तक गुड़ पिघलकर नारियल में मिल न जाए।
- मिश्रण गाढ़ा होने लगे तो इलायची एवं खसखस मिलाकर आँच बंद कर दें।
- ध्यान रहे — अधिक पकाने से भरावन कड़ा हो जाता है, इसलिए हल्का गीला रहने पर ही उतार लें।
आटा गूँथना और मोदक बनाना
- पानी में घी एवं चुटकी भर नमक डालकर उबालें।
- उबलते पानी में चावल का आटा डालकर तुरंत चलाएँ और आँच बंद कर ढक दें।
- दो मिनट बाद गुनगुना रहते ही हथेली पर घी लगाकर आटा मुलायम गूँथ लें — यही सबसे महत्वपूर्ण चरण है।
- छोटी लोई लेकर हथेली पर कटोरीनुमा फैलाएँ, किनारों पर उँगलियों से चुन्नटें बनाएँ।
- बीच में भरावन रखकर चुन्नटों को ऊपर लाकर बंद करें और चोटी जैसी नोक बनाएँ।
- भाप में 10–12 मिनट पकाएँ। ऊपर से घी डालकर अर्पित करें।
तले हुए मोदक
गेहूँ या मैदे के आटे में थोड़ा घी का मोयन डालकर कड़ा आटा गूँथें, वही भरावन भरकर मोदक का आकार दें और धीमी आँच पर सुनहरा होने तक तलें। ये 4–5 दिन तक चलते हैं, इसलिए प्रसाद वितरण के लिए अधिक उपयुक्त रहते हैं।
21 मोदक की परंपरा
गणेश चतुर्थी पर 21 मोदक अर्पित करने की परंपरा है। 21 की संख्या को पूर्णता का प्रतीक माना जाता है — दस इंद्रियाँ, दस प्राण और एक मन। पूजा के बाद यह प्रसाद परिवार एवं पड़ोसियों में बाँटा जाता है।
टिप्स
- चावल का आटा जितना बारीक होगा, परत उतनी पतली बनेगी।
- आटा गूँथते समय हाथ पर घी लगाते रहें — इससे दरार नहीं पड़ती।
- मोदक बनाते समय बाकी आटे को गीले कपड़े से ढककर रखें।
- साँचा (मोल्ड) उपलब्ध हो तो आकार एक समान बनता है।