व्रत के भोजन में साबूदाना खिचड़ी सबसे लोकप्रिय है — नवरात्रि, एकादशी, सोमवार, महाशिवरात्रि, हर व्रत में। शिकायत भी सबसे अधिक इसी की होती है कि “खिचड़ी चिपक गई”। समस्या पकाने में नहीं, भिगोने में होती है।
सामग्री
- साबूदाना — 1 कटोरी (मोटे दाने वाला)
- आलू — 2 मध्यम (उबालकर या कच्चे कटे हुए)
- मूँगफली — 1/2 कटोरी (भूनकर दरदरी कुटी हुई)
- हरी मिर्च — 2 (बारीक कटी)
- जीरा — 1 छोटा चम्मच
- करी पत्ता — 8–10 (वैकल्पिक)
- सेंधा नमक — स्वादानुसार
- नींबू का रस — 1 छोटा चम्मच
- घी या मूँगफली का तेल — 2 बड़े चम्मच
- हरा धनिया एवं कसा नारियल — सजाने के लिए
भिगोने का सही तरीका
- साबूदाना 2–3 बार पानी से धोएँ, जब तक पानी साफ न निकलने लगे — इससे अतिरिक्त स्टार्च निकल जाता है।
- अब इतना पानी डालें कि वह साबूदाने के स्तर से बस एक उँगली ऊपर रहे। अधिक पानी ही चिपचिपाहट का मुख्य कारण है।
- 4 से 5 घंटे, या रातभर ढककर रखें।
- जाँच — एक दाना दबाने पर बीच में सफेद कठोर बिंदु नहीं रहना चाहिए और वह आसानी से दब जाए।
- भीगने के बाद छलनी में 15 मिनट रखकर अतिरिक्त पानी पूरी तरह निकाल दें।
विधि
- भीगे साबूदाने में कुटी मूँगफली और सेंधा नमक मिलाकर हल्के हाथ से मिला लें। यह चरण दानों को अलग रखने में मदद करता है।
- कड़ाही में घी गरम कर जीरा डालें, फिर हरी मिर्च एवं करी पत्ता डालें।
- आलू डालकर सुनहरा होने तक भूनें।
- अब साबूदाना डालें और मध्यम आँच पर हल्के हाथ से चलाएँ — बार-बार ज़ोर से चलाने पर दाने टूटते हैं।
- 4–5 मिनट में दाने पारदर्शी हो जाएँ तो आँच बंद कर दें। अधिक पकाने पर खिचड़ी कड़ी हो जाती है।
- नींबू का रस, हरा धनिया एवं नारियल डालकर परोसें।
चिपकने के तीन कारण
- पानी अधिक — सबसे सामान्य कारण। पानी साबूदाने के बराबर या एक उँगली ऊपर ही रखें।
- धोया नहीं — बिना धोए भिगोने से स्टार्च वहीं रह जाता है।
- ज़्यादा पकाना — दाने पारदर्शी होते ही आँच बंद कर दें।
व्रत में ध्यान रखने योग्य
- सामान्य नमक के स्थान पर सेंधा नमक ही प्रयोग करें।
- हींग एवं हल्दी अनेक परिवारों में व्रत के दिन वर्जित रहती है — अपनी परंपरा देखें।
- मूँगफली का तेल अथवा घी प्रयोग करें; सरसों का तेल व्रत में नहीं लिया जाता।
- प्याज-लहसुन का प्रयोग व्रत में नहीं होता।