मंगलवार हनुमान जी एवं मंगल ग्रह — दोनों से जुड़ा दिन है। जिन जातकों की कुंडली में मंगल दोष अथवा ऋण-रोग की समस्या हो, उन्हें भी यह व्रत करने की सलाह दी जाती है।
व्रत का उद्देश्य
यह व्रत मुख्यतः भय, शत्रु बाधा, ऋण, रोग एवं मानसिक अशांति से मुक्ति के लिए किया जाता है। हनुमान जी को संकटमोचन कहा गया है, इसीलिए संकट काल में मंगलवार व्रत सबसे अधिक प्रचलित है। युवाओं में यह व्रत साहस एवं ब्रह्मचर्य के संकल्प के साथ भी रखा जाता है।
पूजा विधि
- प्रातः स्नान कर लाल अथवा नारंगी वस्त्र धारण करें।
- हनुमान जी की प्रतिमा के समक्ष चमेली के तेल का दीपक जलाएँ।
- सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर चोला अर्पित करें — यह हनुमान पूजा की सबसे विशिष्ट परंपरा है।
- लाल पुष्प, पान का बीड़ा एवं जनेऊ चढ़ाएँ।
- गुड़-चना, बूंदी के लड्डू अथवा केले का भोग लगाएँ।
- हनुमान चालीसा, बजरंग बाण अथवा सुंदरकांड का पाठ करें और आरती करें।
व्रत कथा (संक्षेप में)
कथा के अनुसार एक ब्राह्मण दंपति संतानहीन था। पति वन में जाकर हनुमान जी की आराधना करता और पत्नी घर पर मंगलवार का व्रत रखती। एक मंगलवार वह भोजन नहीं बना सकी और बिना भोग लगाए ही सो गई — छह दिन बाद हनुमान जी उसकी निष्ठा से प्रसन्न होकर प्रकट हुए और उसे पुत्र का वरदान दिया। पुत्र का नाम मंगल रखा गया। कालांतर में पति ने संदेह किया, किंतु स्वयं हनुमान जी ने प्रकट होकर सत्य बताया। तब से मंगलवार व्रत की परंपरा और दृढ़ हो गई।
व्रत के नियम
- दिन में एक बार भोजन किया जाता है, प्रायः मीठा — गुड़, गेहूँ अथवा मीठी रोटी।
- इस दिन नमक का त्याग करने की परंपरा अनेक परिवारों में है।
- मांस, मदिरा एवं तामसिक भोजन पूर्णतः वर्जित।
- ब्रह्मचर्य का पालन किया जाता है।
- हनुमान जी को चढ़ाया सिंदूर स्वयं भी मस्तक पर लगाना शुभ माना जाता है।
- 21 मंगलवार का संकल्प सर्वाधिक प्रचलित है।
दान एवं उपाय
मंगलवार को लाल वस्तुओं का दान शुभ माना जाता है — लाल वस्त्र, मसूर की दाल, गुड़ अथवा ताँबा। मंदिर में लाल ध्वजा चढ़ाना, बंदरों को गुड़-चना खिलाना एवं जरूरतमंद को भोजन कराना प्रचलित उपाय हैं। ऋण की समस्या में “ऋणमोचन मंगल स्तोत्र” के पाठ की सलाह दी जाती है।