🪔 व्रत एवं त्योहार

शुक्रवार व्रत: माँ लक्ष्मी और संतोषी माता की पूजा विधि

✍ vinodvinod.rawat@gmail.com 3 मिनट पढ़ें

संक्षेप में

शुक्रवार का व्रत माँ लक्ष्मी, संतोषी माता और वैभव लक्ष्मी को समर्पित है तथा धन, सुख-समृद्धि और गृहस्थ सुख के लिए रखा जाता है। इस दिन सफेद या गुलाबी वस्त्र पहनकर पूजा की जाती है, गुड़-चने का भोग लगाया जाता है, और संतोषी माता के व्रत में खट्टी वस्तुओं का पूर्ण त्याग किया जाता है।

शुक्रवार शुक्र ग्रह तथा देवी — माँ लक्ष्मी, संतोषी माता एवं माँ दुर्गा — का दिन है। शुक्र सुख, सौंदर्य, वैभव एवं दांपत्य का कारक है, इसीलिए यह व्रत गृहस्थ जीवन से जुड़ी कामनाओं के लिए सर्वाधिक रखा जाता है।

तीन प्रचलित रूप

  • वैभव लक्ष्मी व्रत — धन एवं समृद्धि हेतु, प्रायः 11 या 21 शुक्रवार।
  • संतोषी माता व्रत — मनोकामना पूर्ति हेतु, 16 शुक्रवार; इसमें खट्टा वर्जित है।
  • शुक्रवार देवी व्रत — माँ दुर्गा/संतोषी माता की सामान्य आराधना।

पूजा विधि

  • प्रातः स्नान कर सफेद, गुलाबी अथवा हल्के रंग के वस्त्र धारण करें।
  • चौकी पर लाल या सफेद वस्त्र बिछाकर देवी की प्रतिमा अथवा चित्र स्थापित करें।
  • कलश में जल भरकर रखें और घी का दीपक जलाएँ।
  • सफेद पुष्प, अक्षत, कुमकुम एवं शृंगार सामग्री अर्पित करें।
  • भोग में गुड़-चना (संतोषी माता) अथवा खीर एवं सफेद मिष्ठान्न (लक्ष्मी) रखें।
  • व्रत कथा सुनें, लक्ष्मी चालीसा अथवा “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” का जाप करें, फिर आरती करें।

संतोषी माता व्रत की विशेष बात

इस व्रत में खट्टी वस्तुओं का पूर्ण त्याग किया जाता है — न स्वयं खाना, न घर में किसी को देना। नींबू, इमली, दही, अचार एवं खट्टे फल वर्जित रहते हैं। व्रत 16 शुक्रवार तक चलता है और उद्यापन में आठ बालकों को खीर-पूरी एवं चने का भोजन कराया जाता है। उद्यापन के दिन भी घर में खटाई नहीं आती।

व्रत कथा (संक्षेप में)

प्रचलित कथा एक बहू की है जिसके साथ ससुराल में दुर्व्यवहार होता था और पति परदेस चला गया था। एक वृद्धा के बताए अनुसार उसने संतोषी माता का शुक्रवार व्रत आरंभ किया। सोलह शुक्रवार पूर्ण होते-होते पति लौट आया और परिवार की स्थिति सुधर गई। उद्यापन के दिन बालकों को खटाई मिल जाने से माता रुष्ट हुईं, किंतु क्षमा-प्रार्थना पर पुनः प्रसन्न हो गईं। कथा का भाव — संतोष, धैर्य और नियम का पालन।

व्रत के नियम

  • दिन में एक बार भोजन; संतोषी माता व्रत में खटाई पूर्णतः वर्जित।
  • व्रत कथा सुने बिना व्रत पूर्ण नहीं माना जाता।
  • घर की स्वच्छता एवं संध्या दीपक विशेष रूप से रखा जाता है — लक्ष्मी पूजन में यही मुख्य है।
  • इस दिन झगड़ा, कटु वचन एवं किसी का अपमान वर्जित माना गया है।

दान एवं उपाय

सफेद वस्तुओं का दान शुभ — चावल, दूध, दही, चीनी, सफेद वस्त्र अथवा चाँदी। सुहागिन स्त्रियों को शृंगार सामग्री भेंट करना, गाय को रोटी खिलाना एवं संध्या को तुलसी के समीप दीपक जलाना शुक्र से जुड़े प्रचलित उपाय हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शुक्रवार व्रत में खट्टा क्यों नहीं खाते?

यह नियम विशेष रूप से संतोषी माता व्रत का है। कथा के अनुसार उद्यापन में खटाई आ जाने से माता रुष्ट हुई थीं, इसलिए व्रत अवधि में खटाई का पूर्ण त्याग किया जाता है।

वैभव लक्ष्मी व्रत कितने शुक्रवार का होता है?

सामान्यतः 11 या 21 शुक्रवार का संकल्प लिया जाता है, फिर विधिपूर्वक उद्यापन किया जाता है।

शुक्रवार व्रत में क्या खाएँ?

दिन में एक बार सात्विक भोजन — खीर, सफेद मिष्ठान्न, चना एवं गुड़ प्रमुख हैं। संतोषी माता व्रत में खटाई से पूर्ण परहेज करें।

शुक्रवार को कौन सा रंग शुभ है?

सफेद एवं गुलाबी। ये शुक्र ग्रह से जुड़े रंग माने जाते हैं और देवी पूजा में शुभ रहते हैं।

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