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गोवर्धन पूजा 2026: अन्नकूट विधि, कथा और महत्व

✍ vinodvinod.rawat@gmail.com 3 मिनट पढ़ें

संक्षेप में

गोवर्धन पूजा 2026 में 10 नवंबर को है (पंचांग भेद से कहीं-कहीं 9 नवंबर)। इस दिन गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर पूजा की जाती है और छप्पन भोग अर्थात अन्नकूट अर्पित किया जाता है। यह पर्व श्रीकृष्ण द्वारा इंद्र के अभिमान को शांत करने की कथा से जुड़ा है।

गोवर्धन पूजा कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को, दीपावली के अगले दिन मनाई जाती है। इसे अन्नकूट भी कहा जाता है। 2026 में यह 10 नवंबर को पड़ रही है — कुछ पंचांगों में तिथि भेद से 9 नवंबर भी दर्शाया गया है, इसलिए अपने स्थानीय पंचांग से पुष्टि कर लें।

कथा — पर्वत क्यों उठाया गया

ब्रजवासी प्रतिवर्ष इंद्र की पूजा करते थे। बालकृष्ण ने उनसे कहा कि वर्षा तो प्रकृति का नियम है, और जो पर्वत उन्हें चारा, जल एवं आश्रय देता है — गोवर्धन — पूजा उसकी होनी चाहिए। ब्रजवासियों ने ऐसा ही किया। इससे रुष्ट होकर इंद्र ने प्रलयंकारी वर्षा की। तब श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठा अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर सात दिन तक सम्पूर्ण ब्रज की रक्षा की। अंततः इंद्र का अभिमान टूटा और उन्होंने क्षमा माँगी।

कथा का भाव — प्रकृति और गौ-सेवा का सम्मान, तथा अहंकार पर विनम्रता की विजय।

पूजा विधि

  • प्रातः स्नान के बाद घर के आँगन अथवा द्वार पर गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएँ।
  • उसमें पेड़, गाय, ग्वाल-बाल एवं श्रीकृष्ण की आकृतियाँ भी बनाई जाती हैं।
  • आकृति पर रोली, अक्षत, पुष्प, दूर्वा एवं दही अर्पित करें।
  • दीप जलाकर धूप दिखाएँ और अन्नकूट का भोग लगाएँ।
  • गोवर्धन की सात बार परिक्रमा करें, हाथ में जल का लोटा लेकर धार गिराते हुए।
  • गौ माता का पूजन करें — तिलक कर हरा चारा एवं गुड़ खिलाएँ।

अन्नकूट — छप्पन भोग

अन्नकूट का अर्थ है अन्न का पर्वत। इस दिन नई फसल के अन्न से अनेक व्यंजन बनाकर एक साथ अर्पित किए जाते हैं। परंपरागत रूप से इसमें कढ़ी-चावल, पूरी, सब्जियों की मिली-जुली सब्जी, खीर, हलवा, पुआ, बाजरे की रोटी एवं मौसमी फल सम्मिलित होते हैं। मंदिरों में यही भोग छप्पन भोग के रूप में सजाया जाता है — मान्यता है कि सात दिन तक पर्वत उठाए रखने के कारण कृष्ण ने भोजन नहीं किया था, इसलिए आठवें दिन ब्रजवासियों ने दिन के आठ पहर के हिसाब से 7×8 = 56 प्रकार के व्यंजन अर्पित किए।

गौ पूजन का महत्व

इस दिन गाय एवं बैलों को स्नान कराकर सजाया जाता है, सींगों पर रंग लगाया जाता है और उन्हें विशेष भोजन दिया जाता है। ग्रामीण भारत में यह पर्व पशुधन के प्रति कृतज्ञता का दिन है। कई क्षेत्रों में इसी दिन गोवर्धन परिक्रमा (21 किलोमीटर) करने हजारों श्रद्धालु मथुरा पहुँचते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोवर्धन पूजा 2026 में कब है?

2026 में गोवर्धन पूजा 10 नवंबर को है। तिथि भेद के कारण कुछ पंचांगों में 9 नवंबर भी दिया गया है — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

अन्नकूट में कौन से व्यंजन बनते हैं?

कढ़ी-चावल, पूरी, मिली-जुली सब्जी, खीर, हलवा, पुआ एवं मौसमी फल प्रमुख हैं। मंदिरों में 56 प्रकार तक व्यंजन अर्पित किए जाते हैं।

गोवर्धन पूजा में परिक्रमा कैसे करें?

गोबर से बनी गोवर्धन आकृति के चारों ओर हाथ में जल का लोटा लेकर, जल की धार गिराते हुए सात बार परिक्रमा की जाती है।

क्या गोवर्धन पूजा घर पर की जा सकती है?

हाँ। आँगन या द्वार पर गोबर से छोटी आकृति बनाकर विधिपूर्वक पूजा एवं अन्नकूट अर्पित किया जा सकता है।

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