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श्री विष्णु जी की आरती

पं. श्रद्धाराम फिल्लौरी रचित

🔊 ऑडियो उपलब्ध⏱ 7 मिनट📖 हिंदी⭐ भक्तों की प्रिय

भगवान विष्णु जगत के पालनहार हैं। उनकी सबसे प्रसिद्ध आरती "ॐ जय जगदीश हरे" पं. श्रद्धाराम फिल्लौरी द्वारा रचित है और यह सम्पूर्ण भारत में मंदिरों तथा घरों में गाई जाती है। नीचे इस आरती का शुद्ध एवं सम्पूर्ण पाठ दिया गया है। श्रद्धापूर्वक इसका गान करने से मन को शांति, घर में सुख-समृद्धि और श्री हरि की कृपा प्राप्त होती है।

॥ श्री विष्णु जी की आरती ॥

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे ।
भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट,
क्षण में दूर करे ॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥

जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मन का ।
स्वामी दुख बिनसे मन का ।
सुख सम्पत्ति घर आवे, सुख सम्पत्ति घर आवे,
कष्ट मिटे तन का ॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी ।
स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी ।
तुम बिन और न दूजा, तुम बिन और न दूजा,
आस करूँ मैं जिसकी ॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी ।
स्वामी तुम अन्तर्यामी ।
पारब्रह्म परमेश्वर, पारब्रह्म परमेश्वर,
तुम सबके स्वामी ॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥

तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता ।
स्वामी तुम पालनकर्ता ।
मैं मूरख खल कामी, मैं सेवक तुम स्वामी,
कृपा करो भर्ता ॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति ।
स्वामी सबके प्राणपति ।
किस विधि मिलूँ दयामय, किस विधि मिलूँ दयामय,
तुमको मैं कुमति ॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥

दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे ।
स्वामी तुम ठाकुर मेरे ।
अपने हाथ उठाओ, अपनी शरण लगाओ,
द्वार पड़ा तेरे ॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा ।
स्वामी पाप हरो देवा ।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,
सन्तन की सेवा ॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥

तन मन धन सब कुछ है तेरा, तेरा तुझको अर्पण ।
स्वामी तेरा तुझको अर्पण ।
क्या लागे मेरा, क्या लागे मेरा,
तेरा तुझको अर्पण ॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे ।
जो कोई नर गावे, जो कोई नर गावे,
मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय जगदीश हरे ॥

✦ विष्णु आरती के लाभ ✦

🪷सुख-समृद्धि

श्री हरि की आरती से घर में धन-धान्य, सुख और समृद्धि का वास होता है।

🧘मानसिक शांति

नियमित आरती से मन शांत होता है और चिंता-तनाव दूर होते हैं।

🛡️संकट नाश

भक्तजनों के संकट और कष्ट क्षण भर में दूर हो जाते हैं।

🙏भक्ति में वृद्धि

ईश्वर के प्रति श्रद्धा और भक्ति की भावना प्रबल होती है।