माँ लक्ष्मी धन, वैभव एवं समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी हैं। महालक्ष्मी मंत्र का जाप विशेषकर दीपावली तथा शुक्रवार को अत्यंत फलदायी माना जाता है। नीचे लक्ष्मी मंत्र का संस्कृत पाठ, हिंदी अर्थ एवं जाप विधि दी गई है।
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ।
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः ॥
हे कमल में निवास करने वाली कमलासना माँ महालक्ष्मी! आप प्रसन्न हों, प्रसन्न हों। मैं श्री, ह्रीं आदि बीजाक्षरों सहित माँ महालक्ष्मी को नमस्कार करता हूँ। "श्रीं" लक्ष्मी का बीजाक्षर है जो धन-समृद्धि का प्रतीक है, तथा "ह्रीं" शक्ति एवं ऐश्वर्य का।
शुक्रवार अथवा दीपावली की रात्रि में स्नान करके स्वच्छ लाल आसन पर पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें। माँ लक्ष्मी की प्रतिमा अथवा श्रीयंत्र के समक्ष घी का दीपक जलाएँ, कमलगट्टे अथवा स्फटिक की माला से मंत्र का जाप करें। कम से कम एक माला (108 बार) अथवा अधिक जाप करें। कमल पुष्प एवं मिष्ठान अर्पित करें। स्वच्छता, श्रद्धा एवं शुद्ध उच्चारण आवश्यक है।