होमआरतीश्री कृष्ण जी की आरती

श्री कृष्ण जी की आरती

पारंपरिक आरती

🔊 ऑडियो उपलब्ध⏱ 6 मिनट📖 हिंदी🦚 जन्माष्टमी विशेष

भगवान श्रीकृष्ण प्रेम, भक्ति और आनंद के देव हैं। "आरती कुंजबिहारी की" श्रीकृष्ण की सर्वप्रिय आरती है, जो विशेषकर जन्माष्टमी तथा नित्य पूजा में श्रद्धापूर्वक गाई जाती है। नीचे इसका शुद्ध एवं सम्पूर्ण पाठ दिया गया है। भक्तिभाव से कृष्ण आरती करने पर मन को शांति, प्रेम और श्रीहरि की कृपा प्राप्त होती है।

॥ श्री कृष्ण जी की आरती ॥

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥

गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला ।
श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद, मोहन बृजचंद, हरि सुखकंद ।
राधिका रमण बिहारी की ॥ श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥

गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली ।
रतन में ठाढ़े बनमाली, भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक ।
ललित छवि श्यामा प्यारी की ॥ श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥

कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं ।
गगन सों सुमन रासि बरसै, बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग, ग्वालिन संग ।
अतुल रति गोप कुमारी की ॥ श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥

जहां से प्रकट भई गंगा, कलुष कलि हारिणि श्रीगंगा ।
स्मरण से होत मोह भंगा, बसी शिव सीस, जटा के बीच, हरै अघ कीच ।
चरन छवि श्रीबनवारी की ॥ श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥

चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू ।
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू, हंसत मृदु मंद, चांदनी चंद, कटत भव फंद ।
टेर सुन दीन भिखारी की ॥ श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥

✦ कृष्ण आरती के लाभ ✦

💛प्रेम एवं भक्ति

श्रीकृष्ण की आरती से हृदय में प्रेम और भक्ति का संचार होता है।

🧘मन की शांति

चिंता, भय और तनाव दूर होकर मन को गहरी शांति मिलती है।

🪷सुख-आनंद

जीवन में आनंद, माधुर्य और सकारात्मकता का वास होता है।

🙏श्रीहरि कृपा

भगवान की कृपा से सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।