होमआरतीश्री शनिदेव जी की आरती

श्री शनिदेव जी की आरती

पारंपरिक आरती

🔊 ऑडियो उपलब्ध⏱ 4 मिनट📖 हिंदी🪐 शनिवार विशेष

श्री शनिदेव कर्मफलदाता एवं न्याय के देवता हैं। "जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी" शनिदेव की सर्वप्रिय आरती है, जो विशेषकर शनिवार को श्रद्धापूर्वक गाई जाती है। नीचे इसका शुद्ध एवं सम्पूर्ण पाठ दिया गया है। भक्तिभाव से शनि आरती करने पर साढ़ेसाती, ढैया एवं शनि दोष के कष्ट शांत होकर शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है।

॥ श्री शनिदेव जी की आरती ॥

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी ।
सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी ॥

श्याम अंग वक्र-दृष्टि चतुर्भुजा धारी ।
नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव ॥

क्रीट मुकुट शीश सहज दिपत है लिलारी ।
मुक्तन की माल गले शोभित बलिहारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव ॥

मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी ।
लोहा, तिल, तेल, उड़द महिषी अति प्यारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव ॥

देव दनुज ऋषि मुनि सुमिरत नर नारी ।
विश्वनाथ धरत ध्यान हम हैं शरण तुम्हारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव ॥

✦ शनिदेव आरती के लाभ ✦

🪐शनि दोष शांति

साढ़ेसाती, ढैया एवं शनि दोष के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं।

⚖️कर्मफल सुधार

शुभ कर्मों में वृद्धि होकर जीवन में न्याय और संतुलन आता है।

🛡️संकट नाश

रोग, ऋण एवं संकटों से मुक्ति मिलती है।

🙏शनि कृपा

शनिदेव की कृपा से स्थिरता, धैर्य और सफलता प्राप्त होती है।