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श्री हनुमान जी की आरती

पारंपरिक आरती

🔊 ऑडियो उपलब्ध⏱ 5 मिनट📖 हिंदी🚩 मंगलवार विशेष

श्री हनुमान जी भक्ति, बल और सेवा के प्रतीक हैं। "आरती कीजै हनुमान लला की" बजरंगबली की सर्वप्रिय आरती है, जो विशेषकर मंगलवार तथा शनिवार को श्रद्धापूर्वक गाई जाती है। नीचे इसका शुद्ध एवं सम्पूर्ण पाठ दिया गया है। हनुमान जी की आरती करने से भय, संकट और रोग दूर होते हैं तथा साहस एवं बल की प्राप्ति होती है।

॥ श्री हनुमान जी की आरती ॥

आरती कीजै हनुमान लला की ।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥

जाके बल से गिरिवर काँपे ।
रोग दोष जाके निकट न झाँके ॥

अंजनि पुत्र महा बलदाई ।
संतन के प्रभु सदा सहाई ॥

दे बीरा रघुनाथ पठाए ।
लंका जारि सिया सुधि लाए ॥

लंका सो कोट समुद्र सी खाई ।
जात पवनसुत बार न लाई ॥

लंका जारि असुर संहारे ।
सियारामजी के काज सँवारे ॥

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे ।
आनि सजीवन प्राण उबारे ॥

पैठि पताल तोरि जमकारे ।
अहिरावण की भुजा उखारे ॥

बाईं भुजा असुर दल मारे ।
दाहिने भुजा संतजन तारे ॥

सुर नर मुनि आरती उतारें ।
जय जय जय हनुमान उचारें ॥

कंचन थार कपूर लौ छाई ।
आरती करत अंजना माई ॥

जो हनुमान जी की आरती गावे ।
बसि बैकुण्ठ परम पद पावे ॥

✦ हनुमान आरती के लाभ ✦

🛡️भय एवं संकट नाश

बजरंगबली की आरती से भय, संकट और बाधाएँ दूर होती हैं।

💪बल एवं साहस

हनुमान जी की कृपा से शारीरिक बल, साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है।

👻बुरी शक्तियों से रक्षा

भूत-प्रेत एवं नकारात्मक शक्तियाँ निकट नहीं आतीं।

🙏भक्ति एवं सेवा

राम भक्ति और सेवा भाव की भावना प्रबल होती है।