माँ काली शक्ति की उग्र एवं रक्षक स्वरूपा देवी हैं, जो भक्तों के भय और शत्रुओं का नाश करती हैं। "मंगल की सेवा सुन मेरी देवा" महाकाली की सर्वप्रिय आरती है, जो नवरात्रि तथा मंगलवार को श्रद्धापूर्वक गाई जाती है। नीचे इसका शुद्ध एवं सम्पूर्ण पाठ दिया गया है। भक्तिभाव से काली माँ की आरती करने पर भय, संकट एवं नकारात्मक शक्तियों का नाश होकर माँ का कल्याणकारी आशीर्वाद प्राप्त होता है।
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा, हाथ जोड़ तेरे द्वार खड़े ।
पान सुपारी ध्वजा नारियल, ले ज्वाला तेरी भेंट धरे ॥
॥ संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे ॥
बुद्धि विधाता तू जगमाता, मेरा कारज सिद्ध करे ।
चरण कमल का लिया आसरा, शरण तुम्हारी आन परे ॥
॥ संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे ॥
जब-जब भीर पड़ी भक्तन पर, तब-तब आय सहाय करे ।
बार-बार तैं सब जग मोह्यो, तरुणी रूप अनूप धरे ॥
॥ संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे ॥
माता होकर पुत्र खिलावे, कहीं भार्या भोग करे ।
सन्तन सुखदाई सदा सहाई, सन्त खड़े जयकार करे ॥
॥ संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे ॥
ब्रह्मा वेद पढ़े तेरे द्वारे, शिव शंकर हरि ध्यान धरे ।
इन्द्र कृष्ण तेरी करे आरती, चँवर कुबेर डुलाय रहे ।
जय जननी जय मातु भवानी, अटल भवन में राज करे ॥
अटल सिंहासन बैठी मेरी माता, सिर सोने का छत्र फिरे ।
खड्ग खप्पर त्रिशूल हाथ लिए, रक्तबीज को भस्म करे ॥
॥ संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे ॥
शुम्भ निशुम्भ को क्षण में मारे, महिषासुर को पकड़ दले ।
आदि भवानी जगत जननी, जन अपने का कष्ट हरे ॥
॥ संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जय काली कल्याण करे ॥